भारतीय कच्चे तेल की टोकरी (Indian Basket) अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अलग क्यों होती है?
- अप्रैल 9, 2026
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भारत कच्चे तेल का आयात करते समय सॉर (उच्च सल्फर) और स्वीट (कम सल्फर) क्रूड का मिश्रण उपयोग करता है, ताकि रिफाइनिंग मार्जिन को बेहतर बनाया जा सके। भारतीय बास्केट मुख्यतः ओमान/दुबई (सॉर) और ब्रेंट (स्वीट) क्रूड पर आधारित होती है।
भारत के तेल मिश्रण की प्रमुख विशेषताएँ
संरचना (Composition): भारतीय बास्केट में आमतौर पर 75:25 (सॉर: स्वीट) का अनुपात होता है, जो बाजार की स्थिति और सप्लाई के अनुसार बदल सकता है।
स्रोत (Source Orientation)
- सॉर ग्रेड (उच्च सल्फर): मुख्य रूप से मध्य-पूर्व (सऊदी अरब, इराक, कुवैत) से आयात किया जाता है, क्योंकि यह सस्ता होता है।
- स्वीट ग्रेड (कम सल्फर): सल्फर स्तर कम करने के लिए मिलाया जाता है, जो पश्चिमी देशों या घरेलू स्रोत (जैसे मुंबई हाई) से प्राप्त होता है।
- रिफाइनिंग क्षमता (Refining Economics): भारत की रिफाइनरियाँ (जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, IOCL) अत्याधुनिक हैं, जो सस्ते सॉर क्रूड को प्रोसेस करके Euro-VI मानकों के अनुरूप स्वच्छ ईंधन बना सकती हैं।
यह मिश्रण क्यों महत्वपूर्ण हैः
- लागत बचतः सॉर क्रूड, स्वीट क्रूड से लगभग $4-$10 प्रति बैरल सस्ता होता है।
- रणनीतिक लचीलापनः यह मिश्रण सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे तेल के बीच संतुलन बनाकर बेहतर मार्जिन सुनिश्चित करता है।
- हालिया रुझानः रूस से सस्ता तेल आयात बढ़ने से भारतीय बास्केट में मीडियम-सॉर क्रूड का हिस्सा बढ़ा है, जो भारत की डीजल-केंद्रित मांग के लिए उपयुक्त है।
कीमतों और रिफाइनिंग पर प्रभाव
- “सॉर डिस्काउंट”: सॉर क्रूड आमतौर पर ब्रेंट से $4-$10 प्रति बैरल सस्ता होता है। मार्च 2026 में इसका हिस्सा लगभग 61.02 प्रतिशत रहने से भारत की औसत लागत कम होती है।
- भारतीय बास्केट की गणनाः यह एक वेटेड एवरेज है, जो सॉर (ओमान/दुबई) और स्वीट (ब्रेंट) के मिश्रण से बनता है। इनमें से किसी एक की कीमत या अनुपात में बदलाव से बास्केट कीमत तुरंत प्रभावित होती है।
वर्तमान मूल्य रुझान (2025-2026)
- हालिया उच्च स्तरः 26 मार्च 2026 को भारतीय बास्केट की कीमत $115.75 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो फरवरी 2026 के $69.01 प्रति बैरल औसत से काफी अधिक है।
- आर्थिक प्रभावः प्रति बैरल $1 की वृद्धि से भारत के आयात बिल में लगभग $1.5-$2 बिलियन का अतिरिक्त भार पड़ता है, जिससे महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ता है।
- मूल्य पूर्वानुमानः J.P. Morgan: 2026 में ब्रेंट औसतन $60/BBI रह सकता है। Standard Chartered: कीमतें ऊँची रह सकती हैं, औसत $85.50@bbl
आयात हिस्सेदारी में रणनीतिक बदलाव
- मुख्य सप्लायरः रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया, जिसकी हिस्सेदारी 2023-24 में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई (2022 से पहले केवल 1.7 प्रतिशत)।
- जनवरी 2026: रूस से आयात घटकर लगभग 19.3 प्रतिशत रह गया, क्योंकि भारत ने अमेरिका और खाड़ी देशों से आयात बढ़ाया।
- मार्च 2026: होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण भारत ने फिर से रूसी तेल की ओर रुख किया और आयात बढ़कर लगभग 60 मिलियन बैरल तक पहुंच गया।
रूसी तेल से आयात लागत पर आर्थिक प्रभाव
- कुल बचतः भारत ने FY2023 में लगभग $5ण्1 बिलियन और FY2024 के पहले 11 महीनों में $7.9 बिलियन की बचत रूसी तेल आयात से की।
- “यूराल्स डिस्काउंट”: 2022-23 में यूराल्स क्रूड ब्रेंट की तुलना में $20-$30 प्रति बैरल सस्ता था। 2022-23 में यूराल्स क्रूड ब्रेंट की तुलना में $20-$30 प्रति बैरल सस्ता था। लेकिन 2025 के अंत तक यह अंतर घटकर $3.50-$5 प्रति बैरल रह गया।
- हालिया मूल्य बदलाव (मार्च 2026): स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं और अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट के कारण यूराल्स क्रूड की कीमत बढ़ गई और यह $1.70-$6 प्रति बैरल प्रीमियम पर ट्रेड करने लगा।
- रिफाइनिंग मार्जिन (GRM): सस्ता यूराल्स क्रूड डीजल और जेट फ्यूल जैसे मिडिल डिस्टिलेट्स का अधिक उत्पादन देता है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को बेहतर मार्जिन मिलता है।
- फ्रेट और लॉजिस्टिक्स लागतः रूसी तेल के परिवहन की लागत बढ़कर $15 मिलियन प्रति Aframax जहाज तक पहुंच गई (पहले $10-$12 मिलियन), जिससे कुल लाभ पर दबाव पड़ा।
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