आपूर्तिकर्ता के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जमा करने में विफल रहने की स्थिति में, खरीदारों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) देने से इनकार करने के नियम को, गुजरात उच्च न्यायालय ने एक फैसले में बरकरार रखा है।

मारुति एंटरप्राइज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व संबंधित याचिकाओं के मामले में 1 मई को दिए गए फैसले में न्यायाधीश एएस सुपेहिया और प्रणव त्रिवेदी के एक खंडपीठ ने, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 16(2) (सी) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।

अदालत ने कहा कि आईटीसी एक वैधानिक अधिकार है, जिसके लिए शर्तें तय की गई हैं, यह निहित अधिकार नहीं है।

उद्योग के लिए यह बड़ा जोखिम है। कर नियमों का अनुपालन करने वालेखरीदारों को भी, अपने आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान की चूक का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इस फैसले से कई स्तर की आपूर्ति श्रृंखला वाले व्यवसायों का अनुपालन लागत बढ़ने के साथ कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ेगा।

डेलॉयट के अनुसार श्यह निर्णय जीएसटी के तहत आईटीसी की अनुपालन-संचालित व्याख्या को सुदृढ़ करता है। यह पुष्टि करता है कि आईटीसी की पात्रता आपूर्तिकर्ताओं द्वारा वास्तविक कर भुगतान से अविभाज्य रूप से जुड़ी हुई है। इसलिए, आपूर्तिकर्ता की चूक वास्तविक प्राप्तकर्ताओं के लिए भी एक निरंतर जोखिम बनी हुई है।


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