उत्तर प्रदेश प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन’’ के अध्यक्ष ’’श्री अशोक अग्रवाल’’ के सराहनीय प्रयासों से उत्तर प्रदेश सरकार ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के प्लाईवुड निर्माताओं को राज्य में निवेश की संभावनाओं का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया।

उद्योग प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ का दौरा किया, जहाँ उन्होंने संडीला स्थित ’’ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज़’’ के संयंत्र में उच्च-नमी (High Moisture Core) कोर प्लाईवुड निर्माण तकनीक का अवलोकन किया। फैक्ट्री भ्रमण से पूर्व ’’PICUP भवन’’ स्थित ’’इन्वेस्ट यूपी (Invest UP)’’ कार्यालय में प्लाईवुड निर्माताओं के साथ एक संवादात्मक बैठक आयोजित की गई।

बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने ’’इन्वेस्ट यूपी’’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ’’श्री विजय किरण आनंद’’ के समक्ष उत्तर प्रदेश में निवेश करने की अपनी प्रबल रुचि व्यक्त की। साथ ही उन्होंने वर्तमान एवं संभावित निवेश से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनातियों और सुझावों को भी रखा, ताकि उनके समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकें। बैठक में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे एवं सुझाव रखे गए

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने अनेक उद्योगों के लिए ’’क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीतियाँ’’ बनाई हैं, लेकिन प्लाईवुड एवं पैनल उत्पाद जैसे ’’वुड-बेस्ड उद्योगों’’ के लिए अभी तक कोई अलग नीति नहीं है, जबकि इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
  • इसी प्रकार, प्लाईवुड उद्योग के लिए कच्चे माल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ’’एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी)’’ को बढ़ावा देने के लिए भी कोई व्यापक नीति उपलब्ध नहीं है।

  • उद्योगों और किसानों को ’’कार्बन क्रेडिट योजनाओं’’ का लाभ दिलाने के लिए भी कोई सक्षम नीति नहीं बनाई गई है।
  • सरकार को चाहिए कि वह ’’बंजर एवं पंचायत भूमि’’ को दीर्घकालिक लीज़ पर उद्योगों को उपलब्ध कराने की नीति बनाए, ताकि एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित वृक्षारोपण को बढ़ावा मिल सके।

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जारी ’’वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज़ (स्थापना एवं विनियमन) दिशानिर्देश, 2016’’ के अनुसार, एग्रोफॉरेस्ट्री की छूट प्राप्त प्रजातियों की लकड़ी का उपयोग करने वाले उद्योगों को लाइसेंसिंग की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।
  • औद्योगिक भूमि केवल ’’लीज़होल्ड’’ आधार पर उपलब्ध कराने की नीति के कारण उद्योगों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस नीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

  • सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने की दस्तावेजी प्रक्रिया अत्यधिक लंबी और जटिल है, जिसे सरल बनाया जाना चाहिए।
  • केवल सब्सिडी देने के बजाय राज्य सरकार को उद्योगों के लिए आवश्यक ’’फायर सेफ्टी उपकरण’’, ’’प्रदूषण नियंत्रण अवसंरचना’’ तथा आवश्यक ’’अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC)’’ उपलब्ध कराने में प्रत्यक्ष सहयोग करना चाहिए।

बैठक के दौरान ’’ऑल इंडिया प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA)’’ के अध्यक्ष ’’श्री नरेश तिवारी’’ तथा ’’पंजाब प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’’ के अध्यक्ष ’’श्री इंदरजीत सोहल’’ ने विस्तार से बताया कि पंजाब सरकार वर्तमान में प्लाईवुड उद्योग को कौन-कौन सी सुविधाएँ एवं प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

इसके अतिरिक्त, ’’एम3 ग्रुप’’ के निदेशक ’’श्री अजय गर्ग’’ तथा ’’स्काई डेकोर’’ के निदेशक ’’श्री मनोज बंसल’’ ने भी उत्तर प्रदेश में प्लाईवुड निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने की संभावनाओं और भविष्य के अवसरों पर अपने विचार साझा किए।

इसके अतिरिक्त, ’’एम3 ग्रुप’’ के निदेशक ’’श्री अजय गर्ग’’ तथा ’’स्काई डेकोर’’ के निदेशक ’’श्री मनोज बंसल’’ ने भी उत्तर प्रदेश में प्लाईवुड निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने की संभावनाओं और भविष्य के अवसरों पर अपने विचार साझा किए।फेडरेशन ऑफ इंडियन प्लाईवुड एंड पैनल इंडस्ट्री (FIPPI)’’ के महानिदेशक डॉ. एम. पी. सिंह ने आश्वासन दिया कि फेडरेशन उद्योग द्वारा दिए गए सभी सुझावों को एक व्यापक नीति का स्वरूप देने में राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। उद्योग जगत के सुझावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के ’’इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं औद्योगिक विकास आयुक्त’’ ’’श्री दीपक कुमार’’ ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार शीघ्र ही ’’वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज़ एवं एग्रोफॉरेस्ट्री नीति’’ लागू करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्धी एवं अनुकूल औद्योगिक वातावरण विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि नई नीति के निर्माण के लिए शीघ्र ही एक ’’विशेष समिति’’ गठित की जाएगी, जिसमें उद्योग प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि नीति निर्माण के दौरान उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं एवं समस्याओं का समुचित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।


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