केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में छोटे व मझौले उद्योगों (एसएमई) को ‘‘चैंपियन‘‘ के रूप में बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के समर्पित एसएमई फंड बनाने का प्रस्ताव रखा।

एमएसएमई के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (ट्रेड्स) की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए बजट में वित्त मंत्री ने चार मुख्य उपायों का प्रस्ताव रखा।

जिनमें से एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) द्वारा एमएसएमई से की जाने वाली सभी खरीदों के लिए लेन-देन निपटान प्लेटफॉर्म के रूप में ट्रेड्स को अनिवार्य किया जाए, ताकि यह अन्य कंपनियों के लिए एक मानक स्थापित करे।

सीपीएसयू को यह अनिवार्य किया जाएगा कि वे एमएसएमई को 45 दिनों के भीतर सभी डिस्काउंटेड और नॉन-डिस्काउंटेड बिलों का ट्रेड्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित करें।

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10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड के साथ “पियन एमएसएमई” बनाने का कदम बेहद महत्वपूर्ण है। पहली बार मध्यम आकार की कंपनियों के लिए विशेष नीति पर ध्यान दिया गया है।

एमएसएमई को ट्रेड्स के माध्यम से तरलता सहायता मिलेगी और अब सीपीएसयू के लिए ट्रेड्स का उपयोग अनिवार्य होगा। इसके अलावा क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) द्वारा गांरटी से इनवॉइस डिस्काउंटिंग अधिक समावेशी और आसान बनेगी।

ट्रेड्स को अनिवार्य बनाने का मतलब यह है कि अब हर सीपीएसई यानी सरकारी कंपनी को एमएसएमई के बिल केवल ट्रेड्स के माध्यम से ही निपटाने होंगे, किसी भी ऑफ-प्लेटफ़ॉर्म भुगतान या बाद में समायोजन करने के बहाने की अनुमति नहीं होगी। जब कोई एमएसएमई सरकारी कंपनी को सामान या सेवा देता है, तो उसका बिल् ट्रेड्स पर अपलोड किया जाएगा और कंपनी डिजिटल रूप से बिल को स्वीकार करेगी।

एमएसएमई या तो छूट के जरिए जल्दी भुगतान प्राप्त कर लेगा या नियत तारीख तक इंतजार करेगा। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह भी है कि अब सीपीएसई एमएसएमई आपूर्तिकर्ता के लिए मुख्य ग्राहक बन जाएंगे।


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