व्यय सचिव वी. वुअलनम ने कहा कि वित्त वर्ष 27 के केंद्रीय बजट में राजकोषीय अनुशासन, गुणवत्ता आधारित व्यय और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और उसी दिशा में नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार वित्त वर्ष 27 में उर्वरक सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रही है, जबकि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। सरकार की मुख्य प्रतिबद्धता किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय की एग्री स्टैक पहल बेहतर ढंग से काम कर रही है। आने वाले समय में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के अधिक प्रभावी उपयोग से किसानों की उर्वरक आवश्यकताकृउपयोग और मात्रा दोनों के संदर्भ मेंकृसटीक रूप से आंकी जा सकेगी। इससे किसानों को खाद की दुकानों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की स्पष्ट नीति है।

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सीधे किसानों को उर्वरक सब्सिडी देने के सवाल पर व्यय सचिव ने कहा कि इस विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है और फिलहाल किसी भी विकल्प को खारिज नहीं किया गया है। देश का आकार बड़ा है और किसान पूरे देश में फैले हुए हैं, ऐसे में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) भी एक व्यवहारिक विकल्प हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने, लीकेज को कम करने और यह सुनिश्चित करने पर काम कर रही है कि सब्सिडी का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे, साथ ही राजकोषीय संतुलन और कृषि क्षेत्र के हितों की भी रक्षा हो सके।


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