भारतीय प्लाईवुड उद्योग की वास्तविक चुनौतियाँ
- दिसम्बर 12, 2025
- 0
एबीपीएलटा के प्रो और संयुक्त सचिव के साथ साथ केजीपीएलडीए के प्रो द्य श्री आलोक मोहता से प्लाईवुड उद्योग की समस्याओं पर प्लाई ईन्साइट द्वारा बातचीत के संपादित अंश
वर्तमान में भारतीय प्लाईवुड उद्योग में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
उद्योग में ’’लाइसेंसिंग और निगरानी बेहद कमजोर’’ है।
उनके अनुसारः
’“करीब 25-30 प्रतिशत फैक्ट्रियों के पास ही लाइसेंस है। 5-10 प्रतिशत ने आवेदन किया है। इसके बावजूद बाजार में लगभग हर प्लाईवुड पर ISI स्टैंप लगा मिलता है। यह निगरानी की गंभीर कमी को दर्शाता है।”’
क्या छापेमारी (Inspection) उद्योग में डर पैदा करती है?
’“एक-दो उद्योगों या दुकानदारों पर छापेमारी होने से कुछ समय के लिए उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान होता है, लेकिन इससे उद्योग पर कोई व्यापक असर नहीं पड़ता।”
बड़े प्लांट स्थापित होने से छोटे उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
- बड़े समूह प्लाईवुड, पार्टिकल बोर्ड और MDF के ’’बहुत बड़ी क्षमता वाले प्लांट’’ लगा रहे हैं।
- इससे ’’रॉ मैटेरियल पर भारी दबाव’’ बढ़ रहा है।
- माइक्रो और स्मॉल यूनिट्स की ’’परचेजिंग पावर घट रही है’’।
कई छोटे निर्माता अब ’’सेगमेंट प्रतियोगिता में टिक नहीं पा रहे’’।

मोहता कहते हैं:
’“बड़ी कंपनियाँ अपनी क्षमता का केवल 50-60 प्रतिशत ही उत्पादन कर रही हैं, फिर भी उनमें नुकसान सहने की क्षमता अधिक है। यह लगातार छोटे उद्योगों को कमजोर कर रहा है।”’
लकड़ी की उपलब्धता को लेकर क्या स्थिति है?
लकड़ी का आयात तो बढ़ा है, लेकिन ’’देश में लकड़ी का उत्पादन लगातार घट रहा है’’।
- बड़े शहरों यही तक कि टायर II और टायर III के आसपास की भूमि उद्योग और रियल एस्टेट के कारण अत्यंत महंगी हो गई है।
- ऐसी जमीनें अब कृषि के लिए लाभकारी नहीं रह गई हैं।
इससे घरेलू लकड़ी उत्पादन कम और आयात पर निर्भरता अधिक हो गई है।
अनिवार्य BIS का छोटे और माइक्रो उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?’’
आलोक मोहता मानते हैं कि छोटे उद्योगों को इसका बहुत लाभ नहीं मिलेगा।
कारणः
- अधिकतर छोटी इकाइयाँ ’’पैकिंग प्लाईवुड ग्रेड’’ बनाती हैं।
- इस उत्पाद के लिए BIS स्टैंप की ’’अधिक मांग नहीं है’’।
- ग्राहक इसे सीमित समय के उपयोग के लिए खरीदते हैं, इसलिए BIS मार्क का बड़ा मूल्य नहीं है।
भारतीय प्लाईवुड उद्योग को सबसे बड़ा खतरा किससे है?
’“भारतीय बाजार को सबसे अधिक खतरा सस्ते आयातित उत्पादों से है।”
मोहता के अनुसारः
- यदि ’’न्यूनतम आयातित कीमत (Minimum Import Price)’’ लागू की जाए,
- निम्न गुणवत्ता वाले सस्ते उत्पाद अपने आप रुक जाएंगे
- और भारतीय उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने QCO लागू होने से पहले ’’ऐसा सुझाव उद्योग को दिया भी था।‘‘
क्या सरकार ने हाल ही में उद्योग को कोई राहत दी है?
QCO लागू होने के बाद सरकार कई रियायतें दे रही है।

सबसे महत्वपूर्णः
- ’’लेब टेस्टिंग सुविधा’’ अब 5-10 की जगह ’’25-30 यूनिट्स मिलकर’’ उपयोग कर सकेंगी।
- सरकार ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है।
- इससे छोटे और माइक्रो यूनिट्स की टेस्टिंग लागत में बड़ी राहत मिलेगी।
निष्कर्ष
आलोक मोहता स्पष्ट करते हैं किः
- निगरानी की कमी
- सस्ते आयातित उत्पाद
- बड़ी क्षमता वाले नए प्लांट का दबदबा
- रॉ मैटेरियल की कमी
इन सभी कारणों से ’’माइक्रो और स्मॉल उद्योग सबसे अधिक प्रभावित’’ हो रहे हैं।
वे समाधान के रूप मे
- ’’न्यूनतम आयातित कीमत’’,
- ’’बेहतर निगरानी’’, और
- ’’विनियमित उत्पादन क्षमता’’
की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
👇 Please Note 👇
Thank you for reading our article!
If you don’t received industries updates, News & our daily articles
please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.






Ply insight launched on March 2018 with a vision to make a platform to collaborate plywood MDF, Laminate, machinery manufactures with dealers in the Trade.
Categories
Useful Links
Follow Us