अंतिम उत्पाद पर GST कम होने से उपभोक्ता को लाभ मिलता है। इसी तरह उन उत्पादों पर इनपुट टैक्स कम होने से भी ग्राहक को फायदा मिलता है, जिन पर अंतिम उत्पाद या सेवा पर टैक्स नहीं लगता। लेकिन जहाँ इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है, उसे लागत नहीं माना जाता।

निर्माता को केवल वास्तविक कच्चा माल और इनपुट की लागत ही माननी होती है। यदि GST टैक्स कम होता है, तो इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि भी कम हो जाती है और निर्माता को यह अंतर नकद में चुकाना पड़ता है। इस तरह, कच्चे माल पर टैक्स कम होने से निर्माता पर उल्टा अधिक नकद बोझ पड़ सकता है, और अंतिम कीमतों में कमी संभव नहीं होती।

उदाहरण के लिए, सीमेंट पर GST 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत किया गया। अकाउंटिंग मानकों के अनुसार, यदि इनपुट टैक्स को अंतिम उत्पाद पर देय टैक्स के विरुद्ध सेट-ऑफ किया जा सकता है, तो इनपुट टैक्स को उत्पाद की लागत में नहीं जोड़ा जाता।

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यदि सीमेंट का उपयोग किसी क़ॉमर्शियल प्रोजेक्ट में किया जाता है, तो 28 प्रतिशत टैक्स प्रोजेक्ट की लागत में शामिल नहीं होता, क्योंकि यह कन्सट्रक्सन सर्विस के 18 प्रतिशत GST के विरुद्ध सेट-ऑफ हो जाता है। इसलिए अमूमन कॉन्ट्रैक्टर सीमेंट पर दिए गए टैक्स को अपने बिक्री मूल्य में शामिल नहीं करता।

लेकिन जब GST 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत हो गया, तो इनपुट टैक्स क्रेडिट भी कम हो गया। अब कॉन्ट्रैक्टर को यह अंतर नकद में चुकाना पड़ता है। इसलिए सीमेंट पर टैक्स कम होने से क़ॉमर्शियल प्रोजेक्ट की कीमत नहीं घटती।

दूसरी ओर, यदि कॉन्ट्रैक्टर रिहायशी फ्लैट बनाता है, तो उसे सीमेंट का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में सीमेंट पर दिया गया टैक्स सीधे निर्माण लागत बन जाता है। इसलिए टैक्स घटने पर खरीदार को लाभ मिलना चाहिए।


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