Vikas Khanna

In the coming months, timber availability maybe poor, preparation should be handled from now on.

We should call our contractors and workers back after assessing the situation. Sale and production will have to be evaluated. Decision should be taken accordingly. Otherwise the situation may get worse. Because this season there is a possibility of heavy rain too. So there may be new problems. How the lockdown opening can create better prospects for plywood. A special conversation with Mr VIKASH KHANNA in Talk to Industrialists. Here are the highlights of conversation…

How do you assess the current situation?

Mostly plywood is supplied by truck in bulk. But now the traders are not showing much interest in procuring the full truck load. Because sale has not picked yet. So they are demanding for smaller consignment. As it will ease out unnecessary pressure on them. Situation was not very much smooth even before March. The market is constantly running below expectation. For the last six-seven months discussion was going on , how production should be reduced. Therefore, minimum required workers should be called back, at present. It seems, workers cannot come back from home in June – July. Provision has been made by the state governments that travel will be allowed only if found medically fit. If full workforce is called back now, production will have to increase immediately; and we all know, Market do not allow, at present.

MP, Gujarat and Maharashtra markets may not open in June?

Mostly there were carpenters from Bihar, UP and Rajasthan in these cities and they are now gone back to their home. So now ,it will take time to settle things. Therefore, Industrialist will have to act with a little understanding and PATIENCE. Now we will have to pay more attention to our quality.

How laminate section is going?

Right now its production is also slow. There is no pressure to sell much at this time. There are more chances of goods returning back. Laminate can not be stored for long in this season. Because it is likely to develop problems. Things will start to normalize after September-October.

At present,Industrialist are TENSED,how to OVERCOME?

After every two –three hours, the mind set changes. The mind becomes happy with a positive news, but not always. We will have to work in coming days more carefully. One has to work in the direction, watching the flow. Thinking BIG may be problematic. Next two to four months are very SENSITIVE. This is a Difficult time, it must be admitted. How can we be NORMAL in the situation, is the big question. We should PASS IT VERY SLOWLY and CAUTIOUSLY. Perhaps it is not the RIGHT TIME TO THINK BIG.

But what will be the future?

DEFINITELY IT WILL BE GOOD. We were not exporting earlier also. Our market is too large, all our goods were consumed in the local market here. We should not worry. It will open once again. May just take time. PATIENCE is the KEY WORD At this time.

What about exports

The biggest problem for north India is that the port is not nearby. It costs around 70 thousand in a container. Another problem lies with the quality of glue. If one makes the required quality, it is expensive. The third problem is that we are still not able to produce goods of international standard. We can improve finishing, if there is pre-pressing. This has to be done on a personal level only. But now the cost of exporting goods increases by ten percent , finishing the viability. The industrialists of Kerala are exporting plywood since long. Because the port is close to them. They are benefitted in the transportation.

आने वाले कुछ माह में लकड़ी कम हो सकती है, इससे निपटने के लिए अभी से तैयारी करनी चाहिए

हम अपने ठेकेदार और मजदूरों को अपनी स्थिति देख कर ही वापस बुलाए। सेल और उत्पादन का आंकलन करना होगा। तभी निर्णय लें तो बेहतर रहेगा। अन्यथा स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है। क्योंकि इस बार बरसात भी ज्यादा होने के आसार है। इसलिए दिक्कत आ सकती है। लॉकडाउन खुलने के बाद कैसे प्लाइवुड के लिए बेहतर संभावनाएं बन सकती है। इसी को लेकर टॉक टू इंडस्ट्रियल में इस बार श्री विकास खन्ना से विशेष बातचीत । पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश…

अभी स्थिति क्या है? कैसे आंकलन करते हैं वर्तमान हालात को?

ज्यादातर प्लाइवुड की सप्लाई ट्रक से होती है। लेकिन अब दुकानदार और व्यापारी बड़ी गाड़ी मंगाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। क्योंकि उनके पास अभी सेल नहीं है। इसलिए उनकी डिमांड है कि छोटी गाड़ी भेजी जाए। क्योंकि इससे उन पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। मार्च से पहले भी हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे। मार्केट तो लगातार डाउन ही चल रहा है। पिछले छह सात माह से, यहीं बात चल रही थी कि उत्पादन कम किया जाए। इसलिए अभी मजदूर कम से कम ही बुलानी चाहिए। क्यों कि लगता है, जून और जुलाई में प्रवासी मजदूर वापस नहीं आ सकते। मजदूर वहां से एक सप्ताह पहले आ सकती थी। लेकिन वहां प्रधान ने रोक लगा रखी है। वहां प्रावधान किया गया है कि पहले मेडिकल होगा। फिट पाए जाने पर ही यात्रा करने की इजाजत मिलेगी। अभी लेबर यदि ज्यादा बुला ली गयी तो उत्पादन बढ़ाना होगा। तब दिक्कत आ जाएगी।

जून में अभी एमपी, गुजरात और महाराष्ट्र का बाजार नहीं खुलेगा?

उनके पास ज्यादातर कारपेंटर यूपी और राजस्थान के हैं। महाराष्ट्र में लोकल कारपेंटर नहीं है। वह वापस अपने घरों को चले गए हैं। इसलिए अब चीजे सेटल होने में वक्त लगेगा। इसलिए फैक्टरी संचालकों को थोड़ा समझदारी और धीरज से काम लेना होगा। अब हमें अपनी गुणवत्ता की ओर ज्यादा ध्यान देना होगा।

लेमिनेट में क्या स्थिति है

अभी तो इसका भी उत्पादन कम हो रहा है। इस वक्त ज्यादा सेल करने की जरूरत नहीं है। इसमें ज्यादा चांस माल वापस आने के होते हैं। इसलिए दिक्कत रहती है। लेमिनेट को इस मौसम में ज्यादा स्टोर नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें कई तरह की दिक्कत आने की संभावना रहती है। सितंबर अक्टूबर के बाद हालात सामान्य होने लगेंगे।

मौजूदा समय में उद्योगपतियों में एक तनाव का माहौल है, इससे कैसे उभरे

हर दो घंटे चार घंटे के बाद मन की स्थित बदलती रहती है। काम आ गया तो मन खुश हो जाता है, काम नहीं आया हम दुखी हो जाते हैं। यह कुछ दिन थोड़े संभल कर काम करना होगा। जिस तरफ फ्लो है, उसी दिशा में काम करना होगा। क्योंकि यदि बहुत बड़ा सोच लिया तो दिक्कत आ सकती है। यह दो चार माह का वक्त है, इसे सामान्य तरीके से निकल जाने देना चाहिए। ज्यादा सोचना सही नहीं है। चीजे धीरे धीरे बढ़ेगी। इसलिए वक्त का इंतजार करना होगा। हमें यह मान कर चलना चाहिए कि यह मुश्किल वक्त है। इसे सामान्य रह कर ही निकाला जा सकता है। इसलिए इस से भागना नहीं चाहिए। धीरे धीरे ही आगे बढ़ना चाहिए।

लेकिन आने वाला वक्त कैसा रहेगा

अच्छा ही रहेगा। पहले भी हम कौन सा प्लाइवुड को निर्यात कर रहे थे। तब भी तो सारा माल यहीं के स्थानीय बाजार में खपता था। इसलिए हमारा बाजार बहुत बड़ा है। हमें चिंता नहीं करनी चाहिए। वह एक बार फिर से खुलेगा। बस वक्त लग सकता है।

निर्यात की संभावना है क्या

यहां सबसे बड़ी दिक्कत तो यह है कि बंदरगाह नजदीक नहीं है। एक कैंटेनर में 70 हजार रुपए करीब का खर्च आता है। निर्यात के अंदर दूसरी दिक्कत यह है कि ग्लू की क्वालिटी को लेकर भी समस्या है। यहां वह ग्लू बनता ही नहीं। यदि कोई बनाता है तो महंगा पड़ता है। तीसरी दिक्कत यह है कि हम अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का माल तैयार नहीं कर पा रहे हैं। प्री प्रेसिंग हो तो हम फिनिशिंग बेहतर बना सकते हैं। यह व्यक्तिगत स्तर पर ही करना होगा। लेकिन अभी तो निर्यात करने के माल में दस प्रतिशत कोस्ट बढ़ जाती है। केरल के उद्योगपति निर्यात कर ही रहे हैं। क्योंकि बंदरगाह उनके नजदीक है। इसका उन्हें लाभ मिलता है।