हालांकि, बजट में यह प्रावधान किया गया है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों को कहीं आसानी से ज्यादा कर्ज मिल सकेगा, लेकिन उनकी समस्या कर्ज नहीं, वह तकनीक है, जिसके अभाव में उनके उत्पाद अंतराष्ट्रीय बाजार में अपना स्थान नहीं बना पा रहें हैं।

भारत को जी20 देशों के समूह की अध्यक्षता मिलने के बाद जो प्रमुख लक्ष्य तय किए गए थे, उनमें तकनीक में मानव केंद्रित रूख अपनाया जाएगा और डिजिटल सार्वजनिक अधोसरंचना, वित्तिय समावेशन तथा तकनीक सक्षम विकास वाले क्षेत्रों मसलन, कृषि से लेकर शिक्षा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ज्ञान की साझेदारी को बढ़ाया जाएगा।

तकनीकी प्रगति को आर्थिक विकास का एकमात्र निर्धारक माना जा सकता है। विकसित देश प्रविधि के उच्च स्तर के कारण ही अपना तीव्र विकास कर सके हैं, जबकि अल्प-विकसित देशों की अथाह गरीबी काफी हद तक उनके तकनीकी पिछड़ेपन का परिणाम है।

विकसित देशों में वास्तविक आय में होने वाली वृद्धि दर अकेले पंूजी निर्माण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह तो काफी हद तक उत्पादकता में वृद्धि का परिणाम है जो स्वयं तकनीक प्रगति के फलस्वरूप होती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अमेरिका अर्थव्यवस्था है, जिसके विकास के लगभग 2/3 भाग का श्रेय तकनीक प्रगति को प्राप्त है।


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