वर्तमान तेल संकट भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है, क्योंकि देश की लगभग 85% पेट्रोलियम खपत आयातित तेल पर निर्भर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आयात बिल दोगुना हो सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और रुपया कमजोर होगा।

इन उपायों को आजमाया जा सकता हैः

  1. माल परिवहन सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करना: ट्रकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले डीजल (लगभग 50 मिलियन टन) को कम किया जा सकता है। लंबी दूरी के माल परिवहन को रेलवे की ओर शिफ्ट करने के लिए, रेलवे की दक्षता बढ़ाना, फ्रेट किराया कम करना और Dedicated Freight Corridors (DFC) का विस्तार करना आवश्यक होगा।

1A. रेलवे सुधारः Trucks-on-Train (ToT) सिस्टम लागू करना, फ्लैट वैगनों की संख्या बढ़ाना, समय पर डिलीवरी और विश्वसनीयता में सुधार करना, ताकि सड़क परिवहन से प्रतिस्पर्धा हो सके।

1B. पेट्रोलियम खपत में कमीः 2030 तक 50% माल परिवहन रेल पर शिफ्ट करने का लक्ष्य और 2035 तक इसे 90% तक बढ़ाना। इससे डीजल खपत और कुल ईंधन उपयोग में बड़ी कमी आएगी।

  1. 2. वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देनाः 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल की खपत कम होती है मक्का (corn) की बजाय कृषि अपशिष्ट (agricultural waste) से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना। एथेनॉल प्लांट लगाने और खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकारी समर्थन जरूरी है।
  2. इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देनाः 2030 तक बड़े स्तर पर EV अपनाने का लक्ष्य। कार, बस, और दो/तीन पहिया वाहनों में EV का विस्तार। इससे ईंधन की मांग में भारी कमी आ सकती है।
  3. बायोफ्यूल इकोसिस्टम को मजबूत करनाः कृषि अपशिष्ट के संग्रह और परिवहन की बेहतर व्यवस्था बनाकर बायोफ्यूल उत्पादन को अधिक कुशल बनाना।

निष्कर्ष:

रेलवे सुधार, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, एथेनॉल उपयोग और लॉजिस्टिक्स सुधार के संयुक्त प्रयास से भारत तेल आयात पर निर्भरता कम कर सकता है। वर्तमान तेल संकट को एक अवसर के रूप में उपयोग कर भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।


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