उद्योग का मानना है कि सप्लाई चेन में बाधाएं और बढ़ती इनपुट लागत का सबसे अधिक असर छोटी कंपनियों पर पड़ रहा है, जबकि बड़ी कंपनियां इस स्थिति का फायदा उठाकर अपने मार्केट शेयर और बाजार में पकड़ को और मजबूत कर रही हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई और अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्ष से जुड़ी सप्लाई बाधाओं के कारण पैदा हुई अस्थिरता ने, छोटी कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि उनके पास न तो पर्याप्त स्टॉक रखने की क्षमता है और न ही मजबूत सोर्सिंग नेटवर्क। सिर्फ सप्लाई चेन की रुकावटें ही नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई भी छोटे खिलाड़ियों को अधिक नुकसान पहुंचा रही है।

बड़ी कंपनियां अपनी मजबूत ब्रांड वैल्यू के दम पर बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डाल सकती हैं, लेकिन छोटी कंपनियों के पास ऐसा करने की गुंजाइश कम होती है, जिससे उनके मुनाफे और मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है।

अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्ष और तेल परिवहन में बाधाओं ने बाजार में अनिश्चितता और बढ़ा दी है, जिससे कंपनियों को अपनी सोर्सिंग और इन्वेंटरी रणनीतियों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।

छोटी कंपनियां तत्काल सप्लाई संकट का सामना कर रही हैं, जिससे उनमें तनाव बढ़ता जा रहा है। कई कंपनियों ने कच्चे माल की उपलब्धता में कठिनाई के कारण उत्पादन भी कम कर दिया है।

यह दबाव लगभग हर निर्माता पर दिखाई दे रहा है, जो बढ़ती कच्चे माल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में जब सप्लाई चेन पर “भारी दबाव” होता है, बडे ब्रांड्स को स्पष्ट लाभ मिलता है।

बड़े ब्रांड व्यवधानों को बेहतर ढ़ग से संभालने में सक्षम होते हैं। और कुछ समय तक लागत बढ़ोतरी को खुद वहन कर सकती हैं, जबकि छोटी कंपनियां उत्पादन लागत बढ़ते ही तुरंत कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो जाती हैं।

अशांत परिस्थितियों में बड़े ब्रांड्स के पास टिके रहने की क्षमता अधिक होती है। छोटी कंपनियां बेहद कम मार्जिन पर काम करती हैं, जिससे लगातार बढ़ते कच्चे माल की कीमतों के बीच उनके लिए टिके रहना मुश्किल हो जाता है।

कई बड़े ब्रांड्स “पैसा जलाकर” यानी भारी खर्च करके और डिस्काऊंट देकर अपना मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं, जबकि छोटे ब्रांड्स वैश्विक अस्थिरता के साथ तालमेल बैठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले तिमाही में शीर्ष 5-6 ब्रांड्स ने क्रमिक रूप से 5-6 प्रतिशत अतिरिक्त बाजार हिस्सेदारी हासिल की, जबकि भारत का कुल बाजार लगभग 4-5% गिर गया।

अपुश्ट समाचारों के अनुसार, हाल के महीनों में आधा दर्जन से अधिक छोटे ब्रांड्स ने अपना उत्पादन बंद कर दिया है या लगभग आधा कर दिया है।

“संकट के समय मजबूत और अधिक मजबूत होता जाता है, जबकि कमजोर और अधिक कमजोर। महंगाई से बचाव का मतलब सिर्फ कीमत बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्याप्त स्टॉक रखने की क्षमता भी है।

आखिरकार यह कार्यशील पूंजी का सवाल है।”


👇 Please Note 👇

Thank you for reading our article!

If you don’t received industries updates, News & our daily articles

please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.


Join our Whatsapp Channel “Ply & Panel Ind. News”


Natural Natural