रिहायशी प्रॉपर्टी बाजार कोविड महामारी के बाद आई तेजी के बाद अब एक ठहराव के दौर में प्रवेश कर चुका है।

क्रिसिल ने भी अनुमान जाहिर किया है, कि 2026-27 में रिहायशी मकानों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार, धीमी होकर 3 से 5 फीसदी रह जाएगी, जो 2021-22 से 2024-25 के बीच 11 फीसदी की दमदार वार्षिक वृद्धि के मुकाबले काफी कम है। साल 2023 और 2024 की शुरुआत में जो उत्साह देखी गई थी वह अब दिखाई नहीं दे रही है।

पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच निर्माण की लागत बढ़ गई है। बढ़ी हुई प्रॉपर्टी की कीमतों ने लोगों की खरीद क्षमता को प्रभावित किया है और इसलिए भी लेनदेन की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। एनारॉक ग्रुप के अनुसार श्पश्चिम एशिया में युद्ध और व्यापक वैश्विक चिंताओं के कारण छंटनी और नौकरी संबंधी अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं। ऐसे में खरीदारों को अपनी खरीद योजनाएं स्थगित करनी पड़ रही है।

कीमत वृद्धि में नरमी खरीदारों के लिए अवसर भी लेकर आती है। बड़े डेवलपर अधिक छूट की पेशकश नहीं कर रहे हैं, मगर वे भुगतान में कुछ सहूलियत प्रदान कर रहे हैं। दूसरी ओर अधिक स्टॉक वाले छोटे डेवलपरों के साथ बातचीत और मोलभाव के विकल्प खुले हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के शीर्ष 7 शहरों के द्वितीयक बाजारों में काफी अवसर पैदा हो रहे हैं। अच्छी कीमत चाहने वाले खरीदार छोटे डेवलपरों की ओर रुख कर सकते हैं, बशर्ते निर्माण संबंधी उनका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो।

इस बीच कुछ बड़े डेवलपरों द्वारा पेश की जाने वाली सीमित अवधि की लचीली भुगतान योजनाएं भी कुछ खरीदारों की खरीद क्षमता में सुधार कर सकती हैं। हालांकि डेवलपरों द्वारा सार्वजनिक रूप से कीमतों में कटौती की संभावना नहीं है लेकिन गुप्त रूप से बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है।


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