आयकर विभाग ने करीब ₹8,500 करोड़ के ऐसे सौदों की पहचान की है, जिनमें या तो जमीन और संपत्ति से जुड़े लेनदेन की जानकारी नहीं दी गई है, या संपत्ति का मूल्य कम दिखाया गया है या बेनामी स्वामित्व की आशंका है।

अधिकारियों के अनुसार, इन लेनदेनों में बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद, कृषि भूमि, फार्महाउस और अन्य महंगी संपत्तियां शामिल हैं। विभाग, वित्त वर्ष 2025 में हुए सौदों, (जो वित्त वर्ष 2026 के रिटर्न में दिखाए गए है), के साथ-साथ मौजूदा रिटर्न के लेनदेन की भी जांच कर रहा है।

विभाग के अनुसार, कई मामलों में संपत्ति खरीदने के लिए इस्तेमाल किये गये च्।छ में उस लेनदेन को समर्थन देने लायक घोषित आय नहीं होती है। इसी वजह से विभाग जमीन और संपत्ति की खरीद, बिक्री तथा हस्तांतरण में इस्तेमाल किए गए PAN का, करदाताओं द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न में इस्तेमाल किए गए PAN से मिलान कर रहा है।

अधिकारी, रिटर्न में घोषित निवेश और खरीदी गई संपत्ति के वास्तविक मूल्य के बीच के अंतर की भी जांच कर रहे हैं। इसके अलावा, संपत्ति के कम मूल्यांकन और संपत्ति सौदों में अघोषित नकद भुगतान भी जांच के दायरे में है। बेनामी लेनदेन के मामलों में यह जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि संपत्ति किसी एक व्यक्ति के नाम पर दर्ज हो सकती है, जबकि उसका भुगतान किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किया गया हो और वास्तविक लाभार्थी रिकॉर्ड में मालिक के रूप में दिखाई न दे।

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अधिकारियों का कहना है कि जब लेनदेन का मूल्य, PAN और आयकर रिटर्न से संबंधित आंकड़ों को एक साथ देखा जाता है, तो धन के प्रवाह और संपत्ति के स्वामित्व के बीच असंगति को पहचानना आसान हो जाता है।

यह अभियान आयकर विभाग की जांच रणनीति में व्यापक बदलाव को दर्शाता है। विभाग अब केवल सर्च और सर्वे पर निर्भर रहने के बजाय, लेनदेन स्तर के आंकड़ों का उपयोग करते हुए संभावित कर चोरी के मामलों की पहचान कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के आपसी मिलान और पिछले दो वर्षों में बैंकों तथा डाकघरों सहित रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा दी जा रही अतिरिक्त जानकारी साझा किए जाने से, कर चोरी पर कार्रवाई करने में मदद मिल रही है।

विभाग पहले ही ‘NUDGE’ अभियान चला रहा है, जिसके तहत करदाताओं को उनके रिटर्न और विभाग के पास उपलब्ध जानकारी के बीच संभावित विसंगतियों के बारे में सचेत किया जाता है और रिटर्न में आवश्यक सुधार का अवसर दिया जाता है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने हाल ही में इसी मॉडल का इस्तेमाल अघोषित विदेशी संपत्तियों और आय का पता लगाने के लिए किया था। CBDT के अनुसार, उस अभियान के बाद 24,678 करदाताओं ने अपने रिटर्न संशोधित किए, जिससे ₹29,208 करोड़ की विदेशी संपत्तियों और ₹1,089.88 करोड़ की विदेशी आय का खुलासा हुआ।


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