भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वर्तमान परिस्थितियां
- अक्टूबर 9, 2023
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इस बात में किसी संदेह की गुंजाइश नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वर्तमान समय संभावनाओं से भरा है। कोविड महामारी के दौरान तालाबंदी (लॉकडाउन) से भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर कम होकर 6.6 प्रतिशत रह गई थी, मगर उसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की है। कोविड के बाद के दो लगातार वर्षों में अर्थव्यवस्था 9.1 प्रतिशत और 7.2 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी है।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों के दौरान इसमें कमी जरूर आई है। भारतीय सूचना-प्रौद्योगिकी कंपनियों के कमजोर नतीजे एवं कारोबार को लेकर अनुमान कम रहने के बावजूद सेवा क्षेत्र से निर्यात लगातार मजबूत रहा है।
भारत में डिजिटल ढांचा लगातार मजबूत होने से पूरे देश में सस्ते लेनदेन को बढ़ावा मिला है और सरकार की विस्तारित प्रत्यक्ष लाभ योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना सुलभ हो गया है। पूंजीगत व्यय बढ़ने से भौतिक आधारभूत ढांचा, खासकर सड़क व्यवस्था बहुत मजबूत हुई है, जबकि वित्त वर्ष 2021 में फिसलने के बाद कुछ हद तक राजकोषीय गणित भी दुरुस्त किया जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले 15 महीनों से मौद्रिक नीति के निर्धारण में पूरी समझ-बूझ के साथ काम लिया है। इससे जिंसों की कीमतों में कमी आने के साथ ही उपभोक्ता मूल्य आधारित सूचकांक 6 प्रतिशत से नीचे रखने में मदद मिली है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान बैंक एवं कंपनियों के बही-खाते में काफी सुधार हुआ है। इसे देखते हुए बैंकों को अधिक उधार देने और कंपनियों को अधिक उधार लेने की अनुमति दी गई है।
हमारी अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़कर अब 3.7 लाख करोड़ डॉलर हो गया है। मगर 100 लाख करोड़ डॉलर से अधिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में हमें अपनी उपलब्धि को लेकर अति उत्साह से बचना चाहिए। लेकिन मानव संबंधों की तरह ही कूटनीति एवं अर्थनीति के मोर्चे पर परिस्थितियां कब बदल जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार ‘उच्च अर्थव्यवस्था’ का दर्जा पाने के लिए 9.1 प्रतिशत की दर से आर्थिक वृद्धि दर्ज करनी होगी। भविष्य में उत्पादन और रोजगार में मध्यम से दीर्घ अवधि के दौरान वृद्धि दर को लेकर निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता और यह भारत से बाहर के हालात और हमारी अपनी आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों पर निर्भर है। बाहरी हालात तो हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, मगर आंतरिक स्तर पर ऐसे कई क्षेत्र हैं जिनमें हमें काफी बेहतर करने की जरूरत है तभी तेज वृद्धि दर सुनिश्चित हो पाएगी।





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