आपकी आयकर रिटर्न (ITR) विस्तृत जांच के दायरे में
- जुलाई 14, 2026
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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) की अनिवार्य पूर्ण जांच (Complete Scrutiny) संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश वित्त वर्ष 2025-26 में दाखिल किए गए रिटर्न पर लागू होंगे। ऐसे विशिष्ट मामलों में विभाग को 30 जून 2026 तक जांच नोटिस जारी करना होगा।
संशोधित ढांचे का उद्देश्य उन मामलों पर ध्यान केंद्रित करना है जिनमें कर जोखिम (Tax Risk) अधिक है, जबकि नियमित रूप से नियमों का पालन करने वाले करदाताओं को अनावश्यक जांच से राहत देना है।
पूर्ण जांच या सीमित जांच
आयकर विभाग की जांच मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है-पूर्ण जांच और सीमित जांच यदि विभाग को किसी विशेष दावे, जैसे आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत किए गए दान पर कटौती के दावे में विसंगति मिलती है, तो मामला केवल उसी दावे की जांच के लिए सीमित जांच में लिया जा सकता है।
इसके विपरीत, पूर्ण जांच में करदाता को आय, निवेश, खर्च और कटौतियों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।
यदि 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत कोई सर्वे किया गया है (धारा 133। (2A) के तहत टीडीएस संबंधी सर्वे को छोड़ दिया गया है), तो संबंधित आयकर रिटर्न को अनिवार्य रूप से पूर्ण जांच के लिए चुना जाएगा।
धारा 148 के तहत नोटिस
धारा 148 के तहत नोटिस तब जारी किया जाता है जब आयकर विभाग को यह लगता है कि किसी करदाता की आय का कोई हिस्सा कर निर्धारण से बच गया है और पुराने आकलन को दोबारा खोलने की आवश्यकता है।
CBDT के निर्देशों के अनुसार निम्नलिखित मामलों को अनिवार्य रूप से जांच के लिए चुना जाएगारू 1 अप्रैल 2021 से 1 सितंबर 2024 के बीच हुई तलाशी कार्रवाई से जुड़े मामले। 1 अप्रैल 2021 या उसके बाद किए गए सर्वे से जुड़े मामले। अन्य पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) मामले जिनकी कार्यवाही 31 मार्च 2027 तक पूरी की जानी है।
बार-बार जोड़ी गई आय
ऐसी स्थिति को Recurring Additions कहा जाता है जब आयकर विभाग ने किसी पूर्व वर्ष में करदाता की आय में कोई अतिरिक्त राशि जोड़ी हो और उसके बावजूद करदाता अगले वर्षों में भी उसी कर स्थिति या दावे को जारी रखे।
कर चोरी संबंधी सूचना
आयकर विभाग को अपने जांच प्रकोष्ठ के अलावा विभिन्न एजेंसियों से भी जानकारी प्राप्त होती है, जैसेरू सीमा शुल्क विभाग (Customs) जीएसटी प्राधिकरण (GST Authorities) प्रवर्तन निदेशालय (ED) सेबी (SEBI) विदेशी कर प्राधिकरण यदि इन स्रोतों से प्राप्त जानकारी कर चोरी या अघोषित आय की संभावना दर्शाती है, तो संबंधित आयकर रिटर्न को अनिवार्य जांच के लिए चुना जा सकता है।
करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका आयकर रिटर्न पूरी तरह सही और सटीक हो। अपनी रिटर्न का मिलान वार्षिक सूचना विवरण (ASI), फॉर्म 26 और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से करें। सभी आय स्रोतों का सही खुलासा करें। विदेशी देनदारी और विदेशी आय की जानकारी भी अवश्य दें।
आयकर अधिनियम के अध्याय VI-A के तहत दावे की गई कटौतियों से संबंधित सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें। क्योंकि जांच के दौरान अपने सबूत को प्रमाणित करने की जिम्मेदारी (Burden of Proof) करदाता पर ही होती है।




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