सरकार ई इनवायसिंग का दायरा बढ़ाने की संभावना तलाश रही है। इसके लिए कारोबारियों को अब अपने उत्पाद या सेवाएं सिधे ग्राहकों को बेचने पर इलेक्ट्रॉनिक इन्वायस ;ई. इन्वायस देने को कहा जा सकता है।

ई. इन्वायस का दायरा बढ़ाकर अब उत्पादक से उपभोक्ता के लेनदेन तक किए जाने की संभावना है। इस समय उन कारोबारियों के लिए ई. इन्वायस अनिवार्य है, जिनका बिजनेस.टु.बिजनेस (बी2बी) लेनदेन में कारोबार 5 करोड़ रुपये से ऊपर है।

दायरे को बढ़ाने के लिए शुरूआत में इच्छुक राज्यों के साथ तालमेल करके चुनिंदा क्षेत्रों में स्वैच्छिक आधार पर ई. इन्वायस जारी करने के लिए प्रायोगिक परियोजना का प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस कदम से कर चोरी रोकने और उपभोक्ता लेनदेन के मामलों में नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

जानकारी के मुताबिक जीएसटी कानून के मुताबिक प्रावधान तैयार करने के लिए परिषद ने एक कानून समिति का गठन कर दिया है।। योजना के मुताबिक इसे मंजूरी मिलने के बाद जीएसटी नेटवर्क का मजबूत करने की जरूरत होगी, जिसमें इसके लिए वाणिज्यिक मॉडल तैयार कर उसे अंतिम रूप दिया जाना शामिल है।

इसके प्रायोगिक परीक्षण से कर विभाग को इसकी व्यावहारिकता के बारे में जानकारी मिल सकेगी। साथ ही भारत के संदर्भ में बी2सी ई. इन्वायस के असर के बारे में जाना जा सकेगा।

सू्त्रों का कहना है कि कर विभाग का विचार है कि बी2सी ई. इन्वायस लागू किए जाने से करदाताओं, ग्राहकों और कर प्रशासन को कुछ लाभ होने की संभावना है। इससे पर्यावरण संबंधी लाभ मिलेगा क्योंकि डिजिटल इन्वायस जारी होने से कागज का इस्तेमाल घटेगा। इससे लेनदेन की लागत भी घटेगी और कारोबारियों के लिए यह लागत के हिसाब से बेहतर होगा। ग्राहक आसानी से अपने बिल की प्रामाणिकता की जांच कर सकेंगे।

परिषद द्वारा इसे मंजूरी मिल जाने के बाद इसकी सीमा ;बी2बी लेनदेन की तर्ज पर तय की जा सकती है, लेकिन यह बाद में किया जाएगा क्योंकि अभी यह स्वैच्छिक कोशिश होगी।

वस्तु एवं सेवा कर ;जीएसटीद्ध कानून में बिजनेस.टु.बिजनेस ;बी2बीद्ध कारोबार के लिए ई. इन्वायस का प्रावधान चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य किया गया है। अक्टूबर 2020 में 500 करोड़ रुपये से ऊपर कारोबार करने वाले इंटरप्राइजेज के लिए पहली बार ई. इन्वायस जारी करना अनिवार्य किया गया था। बाद में 1 जनवरी 2021 को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए इसे अनिवार्य बनाया गया। वहीं 1 अप्रैल 2021 से 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का बी2बी कारोबार करने वाली कंपनियों के ई. इन्वायस अनिवार्य कर दिया गया और 1 अप्रैल, 2022 से यह सीमा घटाकर 20 करोड़ रुपये की गई। अंत में 1 अगस्त, 2023 से यह सीमा घटाकर 5 करोड़ रुपये तक कर दी गई।

टधिकारीयों के अनुसार 5 से 10 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले कारोबारियों पर ई.रसीद का नियम लागू करना अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।


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