क्या उद्योग क्यूसीओ के लिए तैयार है?
- जनवरी 9, 2025
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लकड़ी उद्योग में इस वक्त सबसे चर्चित मुद्दा क्यूसीओ का है। हर किसी के मन में यह सवाल है कि क्या QCO तय वक्त पर लागू होगा? अधिकतर प्लाईवुड और पैनल एसोसिएशन चाहती हैं, कि QCO तय समयसीमा में लागू हो जाना चाहिए।
क्योंकि QCO अमल में आते ही कम गुणवत्ता के आयातित उत्पादों पर रोक लगनी आसान हो जाएगी। इसका सीधा लाभ भारतीय बाजार को होगा।
लेकिन क्या हमारा लकड़ी उद्योग QCO मानकों के लिए तैयार है। हम सभी जानते हैं कि कोई भी बदलाव एकदम से न तो स्वीकार होता है, न ही बदलाव के अनुरूप एक दम से उत्पाद तैयार हो सकते हैं। मानकों को अपनाने में कुछ वक्त तो लगता ही है।
भले ही प्लाईवुड और पैनल एसोसिएशनें QCO पर सकारात्मक रूख अपना रही हो, लेकिन गुणवत्ता मानकों को लेकर ऐसे कुछ संशय भी है, जिनका हल तलाशे बिना प्लाईवुड उद्योग को मुश्किल भी आ सकती है।
BIS मानकों की पूरी जानकारी का अभावः
गुणवत्ता मानकों को लेकर दो सालो में चर्चा तो खूब हुई। प्लाई ईनसाइट और वुड टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने मिल कर कई वेबिनार इस विषय पर किए। भारतीय मानक ब्यूरो ने भी समय समय पर कई ‘मानक मंथन‘ कार्यक्रम व कार्यशालाएं आयोजित की। विशेषज्ञों ने इस विषय पर गहनता से समझाने की कोशिश की।
फिर भी उद्योगपतियों के ऐसे कई सवाल हैं, जिनको सुलझाने बेहद जरूरी हैं।
- क्वालिटी कंट्रोल आर्डर लागू होने के बाद लकड़ी की वेस्टेज का रिसाइकिल कैसे होगा?
- जो उत्पाद मानकों के मानदंड के अयोग्य घोषित होगा, उसका निपटारा कैसे किया जाएगा?
- साल में कितने सैंपल मार्केट से और कितने सैंपल फैक्टरी से लिए जाएंगे? क्या इसकी वर्तमान सीमा घटाई जाएगी? मार्केट से लिए जाने वाले सैंपल के लिए ब्यूरो के पास क्या कंट्रोल है?
- सैंपल फैल होने पर क्या कार्यवाही अमल में लायी जाएगी।
- क्या स्टॉप मार्किंग की स्थिति में भी माल बना कर स्टोर किया जा सकता है। यदि इसकी अनुमति नहीं है, तो फिर वहां जो लेबर व अन्य स्टाफ काम कर रहा है, उनका क्या होगा?
नए भारतीय मानक और उत्पादन का पारंपरिक तरीकाः
मानकों में किसी भी उत्पाद को बनाने के लिए रॉ मटेरियल को तैयार करने अथवा उसका चुनाव करने के लिए कुछ निर्देश दिए गए हैं। जो फैक्टरी संचालक बी आई एस लाइसेंस लेगा, उनकी फैक्ट्री विजीट में इसके अनुपालन को प्रदर्शित करने के लिए कहा जा सकता है।
नए मानकों मे, शटरिंग प्लाई बनाने के लिए, पहले प्लाई बना कर, केमिकल रिटेंशन देकर फिल्म चढ़ाने का प्रावधान किया गया है। जबकि, भारत में प्रचलित प्रक्रिया है, प्लाई बनाते वक्त ही फिल्म चढ़ा दी जाती है। इस नई प्रक्रिया को अपनाना, शटरिंग प्लाई निर्माताओं के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
नए भारतीय मानक और फैक्ट्री में परीक्षण सुविधा:
वुड बेस्ड इंडस्ट्री के लगभग सभी मानकों में कुछ नए बदलाव किये जा रहे हैं, जिसमे मुख्यतया फॉर्मलडीहाईड उत्सर्जन की टेस्टिंग और उसकी तय मात्रा की जांच बेहद जरूरी है। अभी तक ज्यादातर फैक्ट्री के पास, अपनी प्रयोगशाला में इस जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। यदि निजी प्रयोगशाला में यह टेस्टिंग सुविधा उपलब्ध कर भी ली जाए, तो इस टेस्ट के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की काफी कमी महसूस होगी। हालांकि फैक्टरी संचालक अपने स्तर पर इस कमी को पूरा करने में लगे हुए हैं। लेकिन इसमें काफी समय लग सकता है।
अब इस स्थिति में यदि इस तरह की जांच, महिने में एक बार भी बाहर की दूसरी प्रयोगशाला से कराएं, तो हर माह होने वाली जांच के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इस तरह से सरकार द्वारा मार्किंग फीस में अगले दो सालों तक जो छूट दी गई है, उसका लाभ संकुचित कर देगा।
मेक इन इंडिया मे क्यूसीओं की भूमिका
देखा जाए तो क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को लागू करना काफी चुनौतीपूर्ण है। फिर भी मानकों के ऐसे अनछुए पहलू भी हैं, जो इसे लागू करने और कम से कम समय में अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि कर इसे अपनाने के लिए उद्योगपतियों को प्रेरित कर रहे हैं।
जिनमे मुख्य है, हमारे माननीय प्रधानमन्त्री जी द्वारा देश को वर्ष 2047 में विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने का सपना, और ‘मेक इन इंडिया‘ और ‘वोकल फॉर लोकल‘ जैसे नारों को वास्तविकता में धरातल पर लेकर आना। निश्चय ही हमारी इंडस्ट्री द्वारा किया गया यह भागीरथ प्रयास, जल्द ही भारतीय बाज़ार में माल की गुणवत्ता के साथ साथ, उपभोक्ता और उद्योग के बीच की दूरी को कम करेगा, और एक नए विश्वास से भरे बाजार में विकास का नया आर्थिक आंकड़ा प्रस्तुत करेगा।
जहां एक ओर, देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, तो दूसरी ओर विश्व स्तर पर भारतीय उत्पादों की साख बढ़ेगी, इंडस्ट्री भी पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकल कर परिपक्व होगी और प्रोफेशनल एवं आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए, उच्च गुणवत्ता पूर्ण उत्पादों के उत्पादन की ओर बढ़ेगी।
यह तो निश्चीत है, कि क्यूसीओ लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता के उत्पाद मिलेंगे। जिसका लाभ हर उपभोक्ता को मिलेगा। क्योंकि मानकों से उनके हक भी सुरक्षित होंगे।
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