लगभग एक दशक से भारतीय उद्योग में दक्षकारीगरों की भारी कमी है। इसकी वजह है कम वेतन

कम से कम उद्योग में एक करोड़ युवाओं की कमी बनी हुई है। इसकी तीन बड़ी वजह है

  • माहिर कामगार को उसी के क्षेत्र में रोजगार देना
  • ऐसी व्यवस्था की जाए कि जितनी मांग है, उतने ही दक्षकामगार उपलब्ध हो।
  • ऐसी व्यवस्था की जाए कि जितनी मांग है, उतने ही दक्षकामगार उपलब्ध हो।

भविष्य में किस क्षेत्र के माहिर युवाओं की जरूरत पड़ने वाली है, इसके लिए पहले से योजना तैयार की जानी चाहिए।

नियोक्ता की दिक्कत यह है कि वह अपने कामगारों को उचित प्रशिक्षण दिलाने के लिए खर्च करने को तैयार नहीं होते।लेकिन वह प्रशिक्षित लोगों को ज्यादा वेतन देने के लिए तैयार है।

उम्मीदवार प्रशिक्षण में खर्च करने के लिए आग्रही नहीं होते, मगर किसी नौकरी के लिए कुछ भी देने के लिए तैयार हैं।

फाइनेंसर कौशल विकास के प्रशिक्षण के लिए कर्ज देने को तैयार नहीं होते हैं, जब तक नौकरी की गारंटी नही, होती हैं

तकनीकी शिक्षा देने वाले संस्थान में प्रशिक्षुओं की कमी है, क्योंकि वह भुगतान नहीं कर पाते।

LM Engineering Machinery Co. P Ltd.

इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत ही पुख्ता कदम उठाने की आवश्यकता है। अपने कर्मचारीयों को प्रशिक्षण दिलवाने मे संसाधन खर्च करने में नियोक्ता क्यों अनिच्छुक होते हैं, इसके तीन प्रमुख कारण समझे जाते हैं:

  • वे प्रशिक्षण के लिए भुगतान करते हैं, और उम्मीदवार को काम नहीं मिलता।
  • वे प्रशिक्षण के लिए भुगतान करते हैं, और उम्मीदवार को काम मिल जाता है, लेकिन वह उपयोगी नहीं होता।
  • वे प्रशिक्षण के लिए भुगतान करते हैं, और उम्मीदवार को काम भी मिल जाता है, लेकिन वह लेकिन वह उस संस्थान को ही छोड़ देता है।

यह कुछ ऐसे तथ्य है, जिससे नियोक्ता अपने कामगारों को आगे प्रशिक्षण देने पर खर्च करने से बचते हैं।

इस तरह की स्थिति से बचने के लिए नियोक्ता ज्यादा से ज्यादा संख्या में डिग्री प्रशिक्षुओं को उचित प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित कर सकते हैं। इस तरह के सुधार से लाखों युवाओं को सीखने का मौका मिलेगा, उनकी दक्षता में सुधार होगा, और जो इसमें नियोक्ता संभावित कामगारों को ट्रायल के लिए रखते हैं। उनमें संस्थान के लिए क्या संभावना है, इसे तलाशते हैं। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से उन्हें प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने हिसाब से अपने काम के लिए तैयार करते हैं। इस तरह से कामगार को अपने काम का व्यापक प्रशिक्षण मिलना संभव हो जाता है।

इससे नए प्रशिक्षु अपने काम को बेहतर तरीके से करने में सक्षम हो जाता है, जबकि नियोक्ता को एक दक्ष कामगार मिल जाता है, जो उसके लिए ज्यादा विश्वसनीय होता है। नियोक्ता के दृष्टिकोण से, वे मापनीयता (स्केलेबिलिटी) विश्वसनीयता और सामान्ता को प्राथमिकता देते हैं।


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