RBI has introduced the डिजिटल पेमेंट्स.ई.मैंडेट फ्रेमवर्कए 2026 जारी किया है। नए नियमों के जरिये ग्राहक कभी भी अपने ई.मैंडेट को बदल या पूरी तरह बंद कर सकते हैं। इससे उन्हें खाते से कटने वाले पैसों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, ऑटो डेबिट सुविधा शुरू करने से पूर्व ग्राहक को एकबार पंजीकरण कराना होगा।

ब्यूरो ऑटो डेबिट से 24 घंटे पहले ग्राहक को मिलने वाले अलर्ट में बैंकों या वित्तीय संस्थानों को यह बताना होगा किः

  • किस कंपनी को पैसा जाएगा।
  • कब और कितनी रकम कटेगी।
  • रेफरेंस नंबर क्या होगा, ताकि गड़बड़ी की स्थिति में ग्राहक तुरंत कार्रवाई कर सके।

अगर ग्राहक चाहे तो इस अवधि में उस भुगतान को रोक भी सकता है। हालांकिए फास्टैग ऑटो रिचार्ज के मामलों में यह पूर्व सूचना जरूरी नहीं होगी।

नए ऑटो-डेबिट फ्रेमवर्क की मुख्य बातें:

  • डेबिट-पूर्व सूचना (Pre-debit Alert):बैंक को किसी भी भुगतान से कम से कम 24 घंटे पहले आपको SMS या ईमेल के जरिए सूचित करना होगा।
  • AFA सीमाः₹15,000 तक के लेनदेन के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण (OTP) की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इससे अधिक की राशि के लिए हर बार OTP जरूरी है।
  • जनादेश प्रबंधन (Mandate Management):आप अपने बैंक पोर्टल के माध्यम से किसी भी समय ई-जनादेश को देख सकते हैं, उसमें बदलाव कर सकते हैं या उसे रद्द कर सकते हैं।
  • दायराःये नियम क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, UPI और अन्य प्रीपेड वॉलेट पर लागू होने वाले सभी आवर्ती भुगतानों पर लागू होते हैं। 

लेनदेन पर प्रभावः

  • सब्सक्रिप्शन और EMI:OTT प्लेटफॉर्म, बिजली-पानी के बिल और लोन की EMI इन नियमों के अंतर्गत आती हैं।
  • सुरक्षाःये नियम अनधिकृत और अचानक होने वाले भुगतानों को रोकते हैं।
  • कार्ड जारी करनाःयदि आपका पुराना कार्ड बदल जाता है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुराने मैंडेट नए कार्ड पर स्थानांतरित कर दिए जाएं। 

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