वर्ष 2026 में प्लाईवुड उद्योग में कीमतों पर काफी दबाव देखने को मिल रहा है। भारत में निर्माता 5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक की मूल्य वृद्धि लागू कर रहे हैं। महामारी के बाद सप्लाई चेन कुछ हद तक स्थिर हुई थी, लेकिन नए भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू कच्चे माल की कमी ने लागत बढ़ने का एक नया दौर शुरू कर दिया है। 

हालिया मूल्य वृद्धि मुख्य रूप से बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई-साइड बाधाओं के कारण हो रही है: 

लकड़ी (Timber) की कमीरू पॉपलर और यूकेलिप्टस जैसी प्रमुख लकड़ी प्रजातियों की कीमतों में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका कारण मौसमी कमी और पेड़ों की कटाई में गिरावट है। बेहतर गुणवत्ता वाली पॉपलर की कीमतें 1700-1750 रुपये तक पहुंच गई हैं वहीं यूकेलिप्टस की कीमतें 1300-1350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं

आयातित लकड़ी की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिसका कारण समुद्री परिवहन (Sea Freight) की लागत में वृद्धि और निर्यातक देशों द्वारा लगाए गए टैक्स हैं। जो उद्योग पहले आयातित लकड़ी और कोर पर निर्भर थे, वे अब स्थानीय लकड़ी की ओर मुड़ गए हैं, जिससे घरेलू लकड़ी पर अतिरिक्त दबाव और मांग बढ़ गई है।

एडहेसिव एवं केमिकल लागतर: फॉर्मल्डिहाइड, फिनोल, मेलामाइन और अन्य पेट्रोलियम आधारित रेज़िन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की अस्थिर कीमतें हैं, जिससे उत्पादन लागत सीधे प्रभावित हुई है।

ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष के बाद एक ही महीने में केमिकल्स की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है। मध्य एशिया की कई प्रमुख रिफाइनरी और LNG प्लांट गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे उत्पादन कम या बंद करना पड़ा है।

पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में चल रहे तनाव ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे कच्चे माल की कीमतों में 10-15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। MR और BWP (शटरिंग) प्लाईवुड लैमिनेट, डक्थ् और पार्टिकल बोर्ड सभी इन प्रभावों का सामना कर रहे हैं।

रूपये का अवमूल्यनः डालर के मुकाबले रूपये के लगातार तेज अवमूल्यन से, सभी प्रमुख कच्चे माल की कीमत पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार रूपया कभी भी अवमूल्यित होकर रू 100 तक पहुचं सकता है। जिससे कीमतों के स्थिर रहने की संभावना कम होती चली जाती है।

उद्योग का भविष्य (Industry Outlook)

लगातार अस्थिरता (Continued Volatility): विश्लेषकों का मानना है कि कुछ तिमाहियों में कीमतों में 2दृ3 प्रतिशत तक मामूली स्थिरता आ सकती है, लेकिन 2026 का कुल परिदृश्य तात्कालिक परिस्थितियों में अनियमीत उछाल बना रहेगा।

उद्योग के प्रबंधक युद्ध के जल्द समाधान की प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन भविष्य की महंगाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मध्य पूर्व में क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत में लंबा समय लग सकता है, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

अस्थिर इनपुट लागतों को समायोजित करने के लिए, उद्योग को वर्ष 2026 के दौरान, कीमतों में बार-बार वृद्धि करनी पड़ सकती है।


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