वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष 2026 में 41,455 करोड़ रूपये अतिरिक्त व्यय के लिए संसद से मंजूरी मांगी है। इसमें 28,000 करोड़ रूपये उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिड़ी के लिए है।

उर्वरक सब्सिडी पर भारत का व्यय (यूरिया और गैर यूरिया दोनों में) वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में पिछले साल के स्तर से अधिक हो गया है, क्योंकि भारत में बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी और एनपीकेएस का आयात हुआ है।

वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में जहां 89,460.65 करोड़ रूपये का आयात हुआ था, वहीं वित्त वर्ष 2026 में पहले ही 1.07 लाख करोड़ रूपये खर्च किए जा चुके हैं।

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वित्त वर्ष 2026 में यूरिया और गैर यूरिया उर्वरक पर करीब 1.68 लाख करोड़ रूपये सब्सिडी का बजट अनुमान लगाया गया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया और तैयार डीएपी और यहां तक कि एनपीकेएस की कीमत भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले साल की तुलना में अधिक है। ऐसे में कुल मिलाकर उर्वरक सब्सिडी 1.9 लाख करोड़ रूपये से अधिक हो सकती है।

इस वजह से सरकार को यूरिया और अन्य उर्वरकों की काला बाजारी पर अंकुश लगाने को तत्पर होना पड़ा है।


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