Is the US shifting its $35 Trillion debt onto the world?

टैरिफ शुरुआत है, क्रिप्टो रीसेट!

याद रखिए, अतीत में अमेरिका ने कैसे अपने कर्ज का बोझ घटायाः

  • 1930: अमेरिका ने नागरिकों का सोना जब्त किया → कर्ज घटा।
  • 1973: निक्सन ने गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म किया → डॉलर दुनिया की मुद्रा बन गया, अमेरिका ने बेहिसाब डॉलर की छपाई शुरू कर दी।

 अब पुतिन के सलाहकार एंटन कोबयाकोव ने चेतावनी दी है कि अमेरिका अपने 35 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज का हिस्सा क्रिप्टो और गोल्ड मार्केट्स में धकेलने की तैयारी कर रहा है और बाद में इसका अवमूल्यन (devaluation) करेगा, जिससे घाटा बाकी धारकों को उठाना पड़ेगा।

यह दावा भले नाटकीय लगे, लेकिन जब आप दो मौजूदा रुझानों को जोड़ते हैं -

  • आक्रामक टैरिफ नीति जो भारी रकम जुटा रही है और
  • डिजिटल डॉलर व स्टेबलकॉइन को मुख्यधारा में लाने का प्रयास -

तो यह रणनीति बेहद संभव लगती है।

टैरिफ आयात पर टैक्स लगाते हैं और तुरंत ट्रेज़री में नकदी लाते हैं। लेकिन टैरिफ एक भोंडे हथियार भी हैं: अगर उद्देश्य है अन्य अर्थव्यवस्थाओं को गैर-डॉलर सेटलमेंट की ओर धकेलना या वैकल्पिक भुगतान प्रणाली स्वीकारने के लिए मजबूर करना।

जब बड़े साझेदारों पर दंडात्मक टैरिफ लगाए जाते हैं, तो दो चीजें होती है:

  • वे डॉलर के जोखिम से बचने की कोशिश करते हैं।
  • वे अपने मुद्रा या वैकल्पिक सेटलमेंट सिस्टम को परखते हैं।

हमने देखा है कि देश युआन, रुपया, रूबल या स्थानीय मुद्राओं में सौदों को निपटाने की कोशिश कर रहे हैं। ये बदलाव तुरंत डॉलर को कमजोर नहीं करते, लेकिन यह साबित करते हैं कि व्यापार गैर-डॉलर शर्तों पर भी संभव है। यही खिड़की है ब्लॉकचेन और टोकनाइज्ड सिस्टम जैसे नए वैश्विक भुगतान ढांचे को आगे बढ़ाने की।

जब बड़े खिलाड़ी कुछ लेन-देन प्रवाहों के लिए गैर-डॉलर निपटान स्वीकार कर लेते हैं, तो वैकल्पिक प्रणालियों - जैसे टोकनाइज्ड, ब्लॉकचेन-आधारित निपटान प्रणालियों - को पायलट करना आसान हो जाता है। यही वह अवसर है जब कोई राष्ट्र दुनिया को नई मौद्रिक संरचना की ओर दिशा दे सकता है।

क्रिप्टो और “स्टेबलकॉइन” क्यों मायने रखते हैं और अमेरिका कैसे दुनिया पर कर्ज शिफ्ट करेगा?

  • अमेरिकी कर्ज वैश्विक हैं:
  • विदेशी केंद्रीय बैंक और, निवेशक की अमेरिकी ट्रेज़री में कई ट्रिलियन डॉलर की सहभागिता है।
  • धीरे-धीरे कर्ज को सोना-समर्थित स्टेबलकॉइन में बदला जाएगा।
  • अब लेनदारों को डॉलर नहीं, बल्कि सोने से जुड़ा क्रिप्टो बकाया रहेगा।
  • सोने की कीमत बढ़ती है / डॉलर कमजोर होता है।
  • गोल्ड-बैक्ड क्रिप्टो की वैश्विक मांग पुराना कर्ज सस्ता कर देता ।
  • डॉलर/बॉन्ड रखने वाले लेनदारों की क्रय शक्ति घटती है।
  • भले ही अमेरिका USG-Coins द्वारा उतना ही भुगतान करें, पर अमेरिका पर असली बोझ घट जाता है।
  • घाटा वैश्विक धारकों पर शिफ्ट हो जाता है।

पाकिस्तानः क्रिप्टो गेमप्लान की प्रयोगशाला

पाकिस्तान हाल के समय की सबसे अवमूल्यित मुद्राओं में से एक है। WLF ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल से समझौता किया है ताकि अर्थव्यवस्था को डिजिटल में बदला जाए।

योजना यह है कि पाकिस्तान का कर्ज किसी दूसरी मुद्रा में स्थानांतरित किया जाए। अगर यह सफल रहा, तो ट्रम्प कमजोर और ऋणग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में इसे तेजी से आगे बढ़ाएंगे।


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