उद्योग की अपेक्षाओं पर खरा बजट
- फ़रवरी 4, 2026
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बजट से पहले हुई चर्चाओं में उद्योग जगत की अपेक्षाएँ कई प्रमुख एजेंडा बिंदुओं के इर्द-गिर्द घूम रही थीं, जिनमें से निम्नलिखित पर इस बजट में स्पष्ट रूप से ध्यान दिया गया है:
- उत्पादन लागत कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर देते हुए घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन
- मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए अनुपालन और प्रक्रियाओं का स्वचालन
- व्यापार प्रथाओं में निश्चितता लाना और मुकदमेबाजी को कम करना
- कार्यशील पूंजी पर दबाव घटाने के लिए शुल्क दरों में उलटफेर (ड्यूटी इनवर्ज़न) को दुरुस्त करना
- ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देना और विश्वास-आधारित व्यवस्था विकसित करना
केंद्रीय बजट के माध्यम से सरकार ने भारत की 7 प्रतिशत विकास दर को बनाए रखने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप कई सुधारों की घोषणा की है। अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में सुधारों का फोकस टैरिफ संरचना को सरल बनाने, घरेलू विनिर्माण को समर्थन देने, निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और शुल्क में उलटफेर को ठीक करने पर रहा है। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इसके अलावा, ‘विकसित भारत’ और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की पूर्व घोषित महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के स्वचालन के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भरोसा किया गया है। माल की सुगम और तेज़ आवाजाही के लिए न्यूनतम हस्तक्षेप की व्यवस्था की जाएगी और जोखिम मूल्यांकन गतिविधियों के लिए एआई तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बजट उद्योग की कई अपेक्षाओं पर खरा उतरता दिखता है।
जीएसटी ढांचा
वित्त विधेयक, 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट (पोस्ट-सेल डिस्काउंट) पर जीएसटी राहत प्रदान की गई है। आम तौर पर आपूर्ति पर जीएसटी लगाया जाता है, लेकिन यदि बाद में छूट दी जाती है तो अतिरिक्त कर का भुगतान हो जाता है। पहले इसके लिए लिखित पूर्व-समझौते और मजबूत दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती थी। प्रस्तावित विधेयक में यह शर्त हटा दी गई है, बशर्ते आपूर्तिकर्ता क्रेडिट नोट जारी करे और खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट को रिवर्स कर दे।
वस्त्र, फार्मा और एफएमसीजी जैसे कई उद्योग उलटी शुल्क संरचना (इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर) के कारण कार्यशील पूंजी के दबाव का सामना कर रहे हैं, जहाँ खरीद पर दिया गया जीएसटी बिक्री पर दिए गए जीएसटी से अधिक होता है। यद्यपि कानून रिफंड की अनुमति देता है, लेकिन प्रक्रिया समय लेने वाली होती है। इसे तेज़ करने के लिए 90 प्रतिशत राशि को प्रोविजनल रिफंड के रूप में देने का प्रस्ताव किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सामान्य सिद्धांत यह है कि निर्यात पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए। अब तक “इंटरमीडियरी” की परिभाषा को लेकर कई विवाद थे। इस बजट में इंटरमीडियरी की अवधारणा को हटाने का प्रस्ताव किया गया है।
इससे यदि ग्राहक भारत के बाहर है, तो सेवा को निर्यात माना जाएगा और रिफंड प्राप्त करना आसान होगा।
हालांकि, यदि ग्राहक भारत में स्थित है, तो ऐसी सेवाओं को आयात माना जाएगा और उस पर भारत में कर देय होगा-इस तथ्य को ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क सुधार
1 अप्रैल 2026 से व्यक्तिगत आयात (पर्सनल इम्पोर्ट्स) पर एक समान 10 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया जाएगा, जिससे पहले की 10 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की स्लैब प्रणाली समाप्त हो जाएगी। इससे व्यक्तिगत उपयोग के लिए वस्तुएँ आयात करने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
‘योग्य विनिर्माता आयातक’ (Eligible Manufacturer Importer) नाम से आयातकों की एक नई श्रेणी शुरू की गई है, जिन्हें 31 मार्च 2028 तक आयात शुल्क के स्थगित भुगतान की सुविधा मिलेगी। इससे ऐसे आयातकों को भविष्य में पूर्ण Tier-III एईओ (Authorized Economic Operator) के रूप में मान्यता लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और वे ट्रस्टेड ट्रेडर प्रोग्राम से बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।
सीमा शुल्क निकासी के क्षेत्र में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा दिया गया है। जिन वस्तुओं के लिए अनुपालन जांच की आवश्यकता नहीं होगी, उनके लिए बिल ऑफ एंट्री दाखिल करते ही और माल के पहुंचते ही सीमा शुल्क को स्वतः सूचना मिल जाएगी, जिससे तुरंत रिहाई संभव होगी। विभिन्न एजेंसियों से अनुमोदन एक ही डिजिटल विंडो के माध्यम से किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया तेज़ और अधिक पूर्वानुमेय होगी।
दो वर्षों में एक नया कस्टम्स इंटीग्रेटेड सिस्टम लागू किया जाएगा, जो सभी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को एकीकृत करेगा और कागजी कार्रवाई को कम करेगा।
इसके अतिरिक्त, प्रमुख बंदरगाहों पर हर कंटेनर की जांच के लक्ष्य के साथ नॉन-इंट्रूसिव स्कैनिंग तकनीक, एडवांस्ड इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ाया जाएगा। इससे सुरक्षा बढ़ेगी, भौतिक जांच की आवश्यकता घटेगी और बंदरगाहों पर माल की आवाजाही तेज़ होगी।
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