फेडरेशन ऑफ इंडियन प्लाइवुड एंड पैनल इंडस्ट्री (FIPPI) की 43वीं वार्षिक आम बैठक में संगठन को मजबूत बनाने, टिकाऊ कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पाद नवाचार, मानकीकरण, व्यापार संरक्षण और भारत के प्लाइवुड एवं पैनल उद्योग के भविष्य के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। वर्तमान में फिप्पी के 55 प्राथमिक सदस्य, 19 संबद्ध सदस्य और 6 एसोसिएट सदस्य हैं।

फाउंडेशन डे और इंडियन प्लाइवुड एंड पैनल कांग्रेस

फिप्पी ने 2 नवंबर 2026 को अपना फाउंडेशन डे मनाने के साथ इंडियन प्लाइवुड एंड पैनल कांग्रेस आयोजित करने तथा एक कॉफी टेबल बुक जारी करने का प्रस्ताव रखा है।

प्रस्तावित कांग्रेस में तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी:

  1. वुड सस्टेनेबिलिटी इस सत्र में एग्रोफॉरेस्ट्री, ट्रीज आउटसाइड फॉरेस्ट (ToF), फार्म-ग्रोन टिम्बर, वैकल्पिक कच्चे माल, कार्बन मार्केट, ग्रीन क्रेडिट, सस्टेनेबिलिटी सर्टिफिकेशन और ट्रेसबिलिटी जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा।
  2. उत्पाद नवाचार और भविष्य के अवसर इसमें हाई मॉइस्चर-रेजिस्टेंट बोर्ड, OSB, सैंडविच बोर्ड, मास प्लाई, इंजीनियर्ड वुड प्रोडक्ट्स, उन्नत एडहेसिव, बायो-बेस्ड रेजिन और अन्य नई तकनीकों एवं उत्पादों पर चर्चा की जाएगी।
  3. भारत के व्यापार को मजबूत बनाना इस सत्र में आयात प्रतिस्थापन, एंटी-डंपिंग उपाय, MIP, कस्टम वैल्यूएशन, निर्यात प्रोत्साहन, वैश्विक प्रमाणन, तकनीकी उन्नयन और नए निर्यात बाजारों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।

उत्पाद नवाचार और मानकीकरण

फिप्पी ने उत्पादों और मानकों से संबंधित कई महत्वपूर्ण विकासों की जानकारी दी, जिनमें शामिल हैं:

  • IS 12406 के तहत MDF ग्रेड की पहचान के लिए कलर कोडिंग का प्रस्ताव।
  • IS 12406 में संशोधन कर MDF और HDF दोनों को शामिल करने का प्रस्ताव, जिसमें HMR और BWP ग्रेड भी शामिल होंगे।
  • लैमिनेटेड फ्लोरिंग और फ्लेक्सिबल प्लाइवुड के लिए ड्राफ्ट मानकों को अंतिम रूप दिया गया।
  • शटरिंग प्लाइवुड के IS 4990 में संशोधन संख्या 1 अगस्त 2026 में प्रकाशित किया गया।
  • IWST को प्लाइवुड एवं पैनल रिजेक्ट्स के उपयोग, प्री-लैमिनेटेड प्लाइवुड तथा फायर-रिटार्डेंट MDF और पार्टिकल बोर्ड से संबंधित परियोजनाएं सौंपी गई हैं।
  • यूरिया आधारित रेजिन पर निर्भरता कम करने के लिए बायो-रेजिन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नीति और कच्चे माल की स्थिरता

फिप्पी निम्नलिखित नीतिगत सुधारों की वकालत कर रहा है:

  • वुड-बेस्ड इंडस्ट्री के लिए MoEF-CC दिशानिर्देशों का प्रभावी और एकसमान क्रियान्वयन।
  • वन वृक्षारोपण में निजी क्षेत्र की भागीदारी।
  • राष्ट्रीय टिम्बर नीति और एग्रोफॉरेस्ट्री एक्ट।
  • राष्ट्रीय एग्रोफॉरेस्ट्री बोर्ड की स्थापना।
  • प्लाइवुड एवं पैनल उत्पादों के लिए डेवलपमेंट काउंसिल का गठन।
  • विभिन्न राज्यों में एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित वुड इंडस्ट्री प्रमोशन पॉलिसी को बढ़ावा।

संगठन टिम्बर सप्लाई चेन में GST अनुपालन को मजबूत करने के लिए भी कार्य कर रहा है। इसके तहत कुछ लेनदेन के लिए रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) और GST TDS जैसे प्रावधानों का प्रस्ताव दिया गया है।

व्यापार संरक्षण और घरेलू विनिर्माण

फिप्पी क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) लागू होने के बाद प्लाइवुड और पैनल उत्पादों के आयात की निगरानी कर रहा है। घरेलू निर्माताओं को अनुचित आयात प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD), काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD), मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस (MIP) और अन्य व्यापारिक उपायों की वकालत की गई है।

इसके अलावा, भारत के भविष्य के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में वुड पैनल उत्पादों को एक्सक्लूजन लिस्ट में शामिल करने की सिफारिश भी की गई है।