वित्त वर्ष 2026 के बजट में सरकार ने करदाताओं को एक बड़ी राहत देने का प्रस्ताव रखा है। अब तक केवल आय कम बताने (Under-reporting) के मामलों में ही जुर्माने और सजा से छूट मिलती थी, लेकिन अब आय गलत बताने (Misreporting) यानी जानबूझकर आय छिपाने जैसे गंभीर मामलों में भी माफी (इम्यूनिटी) का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य टैक्स विवादों को कम करना, अनुपालन आसान बनाना और लंबी मुकदमेबाजी से बचाव करना है।

अंडररिपोर्टिंग और मिसरिपोर्टिंगर: आय कम बताने और आय गलत बताने के मामलों में सबसे बड़ा अंतर मंशा का होता है।

अंडररिपोर्टिंग ऐसे मामले होते हैं, जहाँ करदाता कुछ आय दिखाता है, लेकिन आकलन के दौरान वास्तविक आय अधिक निकलती है। यह गलती, जानकारी की कमी या किसी आय को आय न मानने के कारण हो सकता है। जरूरी नहीं कि हर बार करदाता ने जानबूझकर गलती की हो।

मिसरिपोर्टिंग ज्यादा गंभीर अपराध है। इसमें आमतौर पर जानबूझकर आय छिपाना, खातों में गलत एंट्री करना, फर्जी खर्च दिखाना या गलत कटौती लेना शामिल होता है। इसका उद्देश्य कर अधिकारियों को गुमराह करना होता है।

पहले क्या सजा थी? अब तक मिसरिपोर्टिंग पर कड़े प्रावधान लागू थे कृछिपाई गई आय पर 200 प्रतिशत तक टैक्स गंभीर मामलों में 6 महीने से 7 साल तक जेल इस कारण कई मामले वर्षों तक अदालतों में चलते रहते थे।

अब माफी कैसे मिलेगी? बजट 2026 के प्रस्ताव के अनुसार करदाता निम्न शर्तें पूरी कर माफी प्राप्त कर सकता हैरू बकाया टैक्स और ब्याज का भुगतान निर्धारित जुर्माना जमा छिपाई गई आय पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैक्स इन शर्तों के बाद करदाता को मुकदमे और सजा से राहत मिल सकती है। इससे कर विवादों का जल्दी निपटारा संभव होगा।

करदाता को अपनी आय नियमित करने का अवसर सरकार का मानना है कि इससे लोग स्वेच्छा से अनुपालन करेंगे और टैक्स सिस्टम अधिक व्यावहारिक बनेगा।

लेकिन जोखिम भी हैं यह योजना राहत देती है, लेकिन सावधानी जरूरी है। फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट के तहत जमा राशि वापस नहीं मिलती बाद में गलती साबित होने पर भी रिफंड नहीं माफी चुनते ही अपील का अधिकार समाप्त हो जाता है इसलिए बिना कानूनी सलाह के निर्णय लेना नुकसानदायक हो सकता है।


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