केंद्र सरकार के बजट में डेटा सेंटर के लिए टैक्स हॉलिडे, सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) की स्थापना और टियर-II व टियर-III शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास हेतु फंडिंग जैसी घोषणाएं भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे सकती हैं।

हालांकि बजट में रियल एस्टेट के लिए प्रत्यक्ष घोषणाएं सीमित रहीं, लेकिन विनिर्माण और शहरी विकास पर जोर से औद्योगिक और वेयरहाउसिंग, डेटा सेंटर, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और आंशिक रूप से ऑफिस मार्केट जैसे विभिन्न एसेट क्लास में विकास तेज होने की संभावना है।

वैश्विक क्लाउड सेवा प्रदाताओं जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेज़न को भारतीय डेटा सेंटर सेवाओं का अधिक उपयोग करने के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2047 तक विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए टैक्स हॉलिडे की घोषणा की है, बशर्ते वे भारतीय डेटा सेंटर सेवाओं का उपयोग करें।

इस घोषणा के बाद उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि डेवलपर्स अब भूमि अधिग्रहण, निर्माण, नियामकीय मंजूरी और किरायेदार प्रबंधन में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए डेटा सेंटर को दीर्घकालिक और स्थिर रिटर्न देने वाली परिसंपत्ति के रूप में देखेंगे। आमतौर पर इन पर 15-20 प्रतिशत तक रिटर्न मिलता है। यह बदलाव बढ़ते डेटा उपयोग, 5G के विस्तार और स्टोरेज की बढ़ती जरूरतों से प्रेरित है।

रियल्टी कंपनियां अब बजट घोषणाओं के समर्थन से डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और संचालन में निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। डेटा सेंटर सेवाओं में भूमि, भवन, कंप्यूटिंग सेवाएं और अन्य संबंधित सेवाओं सहित भौतिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाएं शामिल हैं।

इस प्रकार, यदि कोलोकेशन सेवा प्रदाता किसी स्वीकृत योजना के तहत स्थापित हैं और उनका स्वामित्व एवं संचालन भारतीय कंपनी द्वारा किया जाता है, तो उन्हें भी टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।

इन पहलों से न केवल डेटा सेंटर क्षेत्र बल्कि व्यापक रियल एस्टेट बाजार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।


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