सरकार ’’माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs)’’ को ’’म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम (MCGS)’’ के तहत मिलने वाले समर्थन को ’’दोगुना कर ₹200 करोड़’’ करने पर विचार कर रही है, खासकर सुचारू रूप से चल रहे व्यवसायों के लिए। इसके अलावा, योजना की पहुँच बढ़ाने के लिए अन्य संशोधनों जैसे ’’गारंटी शुल्क में कमी’’ पर भी ध्यान दिया जा सकता है। यह पहल देश में ’’विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने’’ के उद्देश्य से शुरू की गई है।

वर्तमान में, MSMEs को दिए गए ₹100 करोड़ तक के लोन गारंटी कवरेज के लिए पात्र हैं। यह स्कीम ’’बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा MSMEs को बिना किसी संपार्श्विक के ऋण उपलब्ध कराने’’ में मदद करती है। स्कीम लागू होने की तारीख से चार साल तक वैध रहती है या जब तक जारी किए गए लोन पर गारंटी ₹7 लाख करोड़ तक नहीं पहुँच जाती, जो भी पहले हो।

इस योजना का ’’शुरुआत 29 जनवरी’’ को हुई थी और यह MSMEs को ’’प्लांट, मशीनरी या उपकरण खरीदने के लिए क्रेडिट उपलब्ध कराने’’ में मदद करती है।

’’स्टेकहोल्डर्स द्वारा उठाए गए अन्य मुद्देः’’ उच्च गारंटी शुल्क, अग्रिम योगदान की आवश्यकता।

’’वर्तमान प्रावधानों के अनुसारः’’ अग्रिम योगदान स्वीकृत लोन राशि का 5 प्रतिशत है, जिसमें संपार्श्विक घटा दिया जाता है, कुल सीमा ₹5 करोड़ तक।’

वार्षिक गारंटी शुल्क लोन शेष राशि का 1.5 प्रतिशत है (पिछले वित्तीय वर्ष के अंत तक) और यह तीन साल तक लागू होता है, बाद में 1 प्रतिशत कर दिया जाता है।’

योजना के तहत ’’नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC)’’ द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ’’60 प्रतिशत गारंटी कवरेज’’ प्रदान की जाती है।’ ₹50 करोड़ तक के लोन की ’’अवधि आठ साल तक’’ है, जिसमें मुख्य राशि पर दो साल की छूट (Moratorium) है।’


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