लकड़ी आधारित उद्योगों का क्षमता आंकलन
- दिसम्बर 12, 2025
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वन नीति का विकास और उद्योग पर प्रभाव
राष्ट्रीय वन नीति, 1952 के अनुसार, भारतीय वनों को वुड-बेस्ड उद्योग के लिए प्रमुख कच्चा माल स्रोत माना गया था, जबकि घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति गाँवों के आसपास के वन क्षेत्रों और सामाजिक वानिकी से होती थी।
लेकिन 1988 की राष्ट्रीय वन नीति के लागू होने के बाद, उद्योग को कच्चे माल की आवश्यकता पूरी करने के लिए किसानों के साथ सीधे साझेदारी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
1980 और 1990 के दशक में राज्य वन विभागों (SFDs) द्वारा लागू सामाजिक वानिकी परियोजनाओं के अंतर्गत निजी क्षेत्र में वानिकी और कृषि-वनीकरण को बढ़ावा दिया गया।
1991 में आर्थिक उदारीकरण के बाद लकड़ी व लकड़ी-आधारित उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी। इस मांग को पूरा करने के लिए 1996 में लकड़ी और संबंधित उत्पादों के आयात को उदार बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

लकड़ी एवं लकड़ी-उत्पादों का आयात और निर्यात
1996 में माननीय सर्वाच्च न्यायालय द्वारा गोदावर्मन मामले में दिए गए निर्णय के तहत सरकारी और “डीम्ड फॉरेस्ट” क्षेत्रों में बिना अनुमोदित वर्किंग प्लान के वृक्ष कटान पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे घरेलू लकड़ी उत्पादन में भारी गिरावट आई, जो आज लगभग 2.3 मिलियन घनमीटर (ICFRE, 2025) है।
वर्तमान में देश की अधिकांश लकड़ी की मांग वनों के बाहर के पेड़ों (TOF) विशेषकर एग्रोफोरेस्ट्री से पूरी होती है, जो लगभग 124.6 मिलियन घनमीटर (ICFRE, 2025) है।
घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अंतर को भरने के लिए, आयात में भारी वृद्धि हुई और आज यह 56.1 मिलियन घनमीटर (RWE) तक पहुँच गया है।
भारत जिन लकड़ी-आधारित उत्पादों का आयात करता है, उनमें शामिल हैं:- पैनल, लकड़ी उत्पाद, पल्प, वुड चिप्स, वेस्ट पेपर, न्यूज़प्रिंट, पेपर एवं पेपरबोर्ड, फर्नीचर I
भारत लकड़ी के मूल्य-वर्धित उत्पादों का निर्यात भी करता है, जिनमें शामिल हैं:- लकड़ी का फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट, खिलौने, झूलेI
वर्तमान में लकड़ी एवं लकड़ी आधारित उत्पादों का निर्यात लगभग 14.9 मिलियन घनमीटर (RWE) है। हालांकि आयात और निर्यात दोनों में वृद्धि हो रही है, लेकिन निर्यात का मूल्य अभी भी आयात की तुलना में बहुत कम है, जो बताता है कि भारत लकड़ी उत्पादों का शुद्ध आयातक (Net Importer) है।
2022-23 में लकड़ी उत्पादों का आयात मूल्य ₹771,690 मिलियन था, जो देश के कुल आयात का 1.5 प्रतिशत है (Dhiman, 2025)।

भारत में लकड़ी की मांग
भारत की वुड-बेस्ड इंडस्ट्री को 3 प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः
1. सॉन टिम्बर-निर्माण, फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट
2. कंपोजिट वुड पैनल-प्लाईवुड, पार्टिकल बोर्ड, MDF
3. पेपर और पल्प उद्योग
भारत का वुड क्षेत्र मुख्यतः असंगठित (Unorganised) क्षेत्र में आता है और MSME आधारित है।
पेपर और पल्प उद्योगः प्रत्यक्ष रोजगारः 6 लाख, अप्रत्यक्ष रोजगारः 16 लाख, देश में पेपर मिलें: 759, प्रोजेक्टेड लकड़ी मांगः 21.7 मिलियन घनमीटर (RWE)
हैंडीक्राफ्ट एवं अन्य क्षेत्रों की मांगः 13.4 मिलियन घनमीटर
प्लाईवुड उद्योगः FIPPI के अनुसारः
80 प्रतिशत उत्पादन असंगठित क्षेत्र में, 20 प्रतिशत संगठित क्षेत्र में
कुल इकाइयाँ: 3,132, रोजगारः 10 लाख से अधिक
प्रोजेक्टेड मांगः 70.5 मिलियन घनमीटर
PB और MDF उद्योगः PB इकाइयाँ: 47, MDF इकाइयाँ: 12 संयुक्त खपतः 9.1 मिलियन घनमीटर (RWE)
निर्माण उद्योग की लकड़ी मांगः 6.0 मिलियन घनमीटर (RWE)
एग्रोफोरेस्ट्री और उद्योग के एकीकृत मॉडल का महत्व
भारत में कच्चे माल की कमी को दूर करने के लिएः WIMCO Seedlings Ltd- (UP, Uttarakhand) ने 1984 में पॉपलर खेती को बढ़ावा दिया। उनके माडल में सम्मिलित थेः- गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराना, बैंक ऋण की सुविधा, वैज्ञानिक कृषि-वनीकरण पद्धतियाँ, “बाय-बैक” गारंटी।
इससे उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में पॉपलर की खेती तेजी से बढ़ी। क्योंकि पारंपरिक कृशि फसलों से यह अधिक फायदेमंद समझा गया।
FRI देहरादून द्वारा किए गए R&D प्रयासों से पोपलर और यूकेलिप्टस की बड़ी पैमाने पर खेती को बढ़ावा मिला।
ITC Bhadrachalam Pvt. Ltd. (दक्षिण भारत) ने 1989 सेः क्लोनल यूकेलिप्टस, काजू, सुबाबुल की खेती को बढ़ावा दिया। इससे देशभर में न केवल उद्योग को आपूर्ति हुई बल्कि क्लोनल यूकेलिप्टस का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ।
कृषि भूमि पर लगाए गए वृक्षारोपण से अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिलने के कारण पारंपरिक खेती के साथ एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी है। हालांकि, कृषि-वनीकरण (Agroforestry) के तहत आने वाला क्षेत्र लकड़ी और कृषि फसलों की तुलनात्मक लाभप्रदता के आधार पर उतार-चढ़ाव करता रहता है। घरेलू बाजार में लकड़ी की ऊँची कीमतों के कारण भारत ने पॉपलर, चीड़, यूकेलिप्टस और अन्य प्रजातियों के आयात पर अधिक निर्भरता बढ़ा दी है।
भारत की आवश्यकताः
भारत को अपनी बढ़ती मांग पूरी करने के लिए 2047 तक लकड़ी उत्पादन को 250 मिलियन घनमीटर तक दोगुना करना होगा।
इसके लिए 2 प्रमुख कदम आवश्यक हैं: 1. एग्रोफोरेस्ट्री का क्षेत्र बढ़ाना 2. वानिकी फसलों की उत्पादकता बढ़ाना
वर्तमान में एग्रोफोरेस्ट्री भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3.9 प्रतिशत (FSI, 2023) है। इसे बढ़ाने के लिए एग्रोफोरेस्ट्री और उद्योग के एकीकृत मॉडल अत्यंत आवश्यक हैं।
नीतिगत पहल (Policy Initiatives)
विश्व की अग्रणी फर्नीचर कंपनियाँ जैसेः IKEA, Hettich, Casa Shamuzzi- भारत में भारी निवेश कर चुकी हैं। वे पोर्ट-आधारित क्लस्टरों में विनिर्माण सुविधा स्थापित कर रही हैं। IKEA ने कई मेट्रो शहरों में अपने खुदरा आउटलेट भी शुरू किए हैं।
भारत में घरेलू ई-कॉमर्स ब्रांड जैसेः PepperFry, Urban Ladder, FabFurnish भी तेजी से बढ़ रहे हैं। Amazon और Flipkart भी इस श्रेणी में प्रवेश कर चुके हैं।

कांडला (गुजरात) जैसे बंदरगाहों पर आयातित कच्चे माल की उपलब्धता के कारण कई प्लाईवुड फैक्ट्रियाँ विकसित हुई हैं। घरेलु और वैश्विक उद्योगपतियों द्वारा निवेश ने सकारात्कम रूप से भारत की मध्यम-वर्गीय आकांक्षाओं और निर्यात क्षमता दोनों को बढ़ा रहा है। सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आयात निर्भरता को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
- बड़े वुड-बेस्ड उद्योगों को PLI योजना का लाभ दिया जाए।
- राज्यों में नीतियों के समन्वय हेतु एग्रोफोरेस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड बनाया जाए।
- किसानों और उद्योगों द्वारा वृक्षारोपण बढ़ाने के लिए निम्न सुविधाएं प्रदान की जाएं: रियायती ऋण पूंजी सब्सिडी जोखिम प्रबंधन योजनाएँ
- EXIM नीति में सुधार कर गैर-जरूरी आयात हतोत्साहित किए जाएँ और मूल्य-वर्धित घरेलू उत्पादों का निर्यात बढ़ाया जाए।
निष्कर्ष वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीःश्रम-प्रधान है स्कूल ड्रॉपआउट युवाओं को भी रोजगार देती है नवीकरणीय संसाधन (Wood) पर आधारित है किसानों को पारंपरिक फसलों से अधिक आय प्रदान करती है ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करती हैI
कार्बन अवशोषण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन शमन में बड़ा योगदान देती है इस क्षेत्र को बढ़ावा देना भारत के लिए न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरणीय रूप से भी अनिवार्य है।
वुड-बेस्ड उद्योग के लिए एक मजबूत नीतिगत दृष्टिकोण रोजगार, उद्यमिता, निर्यात और पर्यावरण संरक्षण-सभी में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करेगा।
References
- Dhiman, R. C., 2025: Pramaan to Parinaam, The Ply Reporter, August 2025
- FSI, 2023. India State of Forest Report 2023, Forest Survey of India, Dehradun
- ICFRE, 2025. Assessment of Demand and Supply of Timber, Fuelwood and Fodder in India (AICRP-12), ICFRE, Dehradun
- Kant, P., Nautiyal, R., 2021. India Timber Supply and Demand 2010-2030, International Tropical Timber Organization, Yokohama
- Sapra, R. K., 2025. India’s Forest and Tree Cover: A Decade of Change and Challenges (2013-2023), Van Premi, February 2025
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