वित्त मंत्रालय द्वारा दीर्घकालिनक स्थिरता पर जोर
- मई 1, 2026
- 0
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट से निपटने के क्रम में अल्पकालिक वृद्धि के पीछे भागने के बजाय, भारत को मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता को सुरक्षित रखना चाहिए और लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कई देशों के लिए अल्पकालिक वृद्धि के बढावा देना और रोजगार बचाना आकर्षक लग सकता है। मगर वृहद आर्थिक स्थिरता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अल्पकालिक वृद्धि को बहाल करने के सतर्क प्रयास बाहरी संतुलन, मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और मुद्रा को अस्थिर करके मध्यम से लंबी अवधि की वृद्धि की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वर के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है, भारत को आयात के लिए किसी एक स्त्रोत की निर्भरता को दूसरे से बदलने के बजाय ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही इसमें ध्यान रखना चाहिए कि आपूर्ति पर अचानक से किसी तरह का असर न पड़े।श्
रिपोर्ट में कृषि और जल नीतियों में लंबे समय से लंबित सुधारों को पूरा करने की जरूरत बताई गई है। इसमें कहा गया है, ‘‘लंबे समय से लंबित नीतियों को लागू करने का यह आदर्श समय है।“
रिपोर्ट में ऐसा श्रमबल बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया जो तकनीक में आने वाले बदलावों का सामना कर सके।
रिपोर्ट ने कर नीति में निश्चितता और स्थिरता के महत्त्व पर जोर दिया और आगाह किया कि अल्पकालिक वृद्धि को बनाए रखने पर अत्यधिक ध्यान देने का जोखिम व्यापक आर्थिक हितों पर हावी नहीं होना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, “यदि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के परिणामस्वरूप इस वित्त वर्ष में इन मोर्चों पर टिकाऊ प्रभाव के साथ सार्थक कार्रवाई होती है तो भारत आने वाले वर्षों में निरंतर उच्च वृद्धि के लिए मजबूत नींव के साथ उभरेगा।“
रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया का संघर्ष आपूर्ति में एक बड़ा झटका है वहीं भारत की घरेलू मांग, मजबूत वित्तीय प्रणाली और लगातार हो रहे सार्वजनिक निवेश कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट के बीच आपूर्ति पक्ष से जुड़े झटके की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि बढ़ती कीमतों और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने से मांग में कमी भी चिंता का विषय है।
रिपोर्ट के अनुसार आगे चलकर मांग की स्थिति और आर्थिक गतिविधियों पर कच्चे माल की लागत और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों से पैदा होने वाले दबाव का असर पड़ेगा।
हालांकि अगर युद्ध विराम के साथ शांति बनी रहे तो उम्मीद है कि 2026 की दूसरी छमाही में हालात बेहतर होंगे।
👇 Please Note 👇
Thank you for reading our article!
If you don’t received industries updates, News & our daily articles
please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.






Ply insight launched on March 2018 with a vision to make a platform to collaborate plywood MDF, Laminate, machinery manufactures with dealers in the Trade.
Categories
Useful Links
Follow Us