पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने मैसूर पेपर मिल्स (MPM) को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि औद्योगिक उद्देश्यों के लिए लगाए गए प्लांटेशन को वानिकी गतिविधि माना जाएगा, बशर्ते वे स्वीकृत वर्किंग प्लान या मैनेजमेंट प्लान के अनुसार किए जाएँ।

इससे पहले, वन (संरक्षण) अधिनियम में संशोधित दिशानिर्देशों के तहत कम अवधि (लो-रोटेशन) वाले प्लांटेशन को गैर-वानिकी गतिविधि घोषित कर दिया गया था। इसी वजह से लगभग 5,000 एकड़ तैयार प्लांटेशन की कटाई रोक दी गई थी। इस फैसले से MPM को लगभग 56,000 एकड़ वन भूमि पर प्लांटेशन गतिविधियाँ फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हुआ है।

कर्नाटक सरकार द्वारा की गई प्रस्तुति के बादकृऔर केरल, मध्य प्रदेश तथा उत्तराखंड से आए समान अनुरोधों को देखते हुएकृइस मुद्दे पर वन सलाहकार समिति (FAC) ने विचार किया।

समिति ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों द्वारा स्वीकृत वर्किंग प्लान के तहत, वन पुनर्स्थापन और सतत उपयोग के उद्देश्य से किए गए प्लांटेशन को पूरी तरह व्यावसायिक या गैर-वानिकी नहीं माना जा सकता। इसके परिणामस्वरूप, ऐसी प्लांटेशन गतिविधियाँ अब राज्य वन विभाग की निगरानी में वानिकी कार्य मानी जाएँगी।

साथ ही, समिति ने राज्य सरकारों को प्लांटेशन के उपयोग और राजस्व साझा करने के लिए केस-दर-केस ढांचा तय करने का अधिकार भी दिया है।

कुल मिलाकर, यह निर्णय नियामकीय राहत प्रदान करता है।


 👇 Please Note 👇

Thank you for reading our article!

If you don’t received industries updates, News & our daily articles

please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.


Natural Natural