’’भारत सरकार के नए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के अनुसार, 28.02.2025 से प्लाइवुड, MDF और पार्टिकल बोर्ड पर अनिवार्य BIS प्रमाणन लागू किया गया है, जिसकी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई है।’’

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की इस पहल का उद्देश्य उत्पाद गुणवत्ता में सुधार तथा ISI मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करना है।

’’ABPLTA इस मानकीकरण और उपभोक्ता सुरक्षा की दिशा में उठाए गए कदम का पूर्ण समर्थन करता है।’’

हालांकि, पिछले कुछ महीनों में बाजारों में एक गंभीर चिंता सामने आई है - BIS प्रवर्तन दल डीलर एवं ट्रेडर प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर रहे हैं, मामले दर्ज कर रहे हैं तथा ईमानदार व्यापारियों की पेशेवर छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

हम निम्न तथ्य अभिलेख में रखना चाहते हैं:

  • व्यापारी निर्माता नहीं हैं

डीलर और ट्रेडर प्लाइवुड या पैनल का निर्माण नहीं करते। हम केवल निर्माताओं द्वारा आपूर्ति की गई सामग्री बेचते हैं। ’’BIS लाइसेंस और ISI मार्किंग की जिम्मेदारी पूरी तरह फैक्ट्रियों की होती है।’’

  • उद्योग की वास्तविक स्थिति

आज भारत में लगभग ’’6000+ प्लाइवुड निर्माण इकाइयाँ’’ हैं, जबकि सरकारी पोर्टल के अनुसार केवल लगभग ’’1200 फैक्ट्रियों के पास वैध BIS लाइसेंस’’ है।

अर्थात ’’4000+ इकाइयाँ अभी भी बिना BIS स्वीकृति के संचालित हो रही हैं’’, और उनकी सामग्री खुले रूप से बाजार में आ रही है।

ऐसी स्थिति में, जब प्रणाली अभी विकसित ही हो रही है, प्रत्येक व्यापारी से तकनीकी रूप से ISI की प्रामाणिकता सत्यापित करने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।

  • व्यापारी आसान लक्ष्य बन रहे हैं

बिना लाइसेंस वाली फैक्ट्रियों (स्रोत) पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय, कार्रवाई अंतिम बिक्री बिंदु पर हो रही है। यह अनुचित है और छोटे एवं मध्यम व्यापारियों में भय उत्पन्न कर रहा है, जो पहले से ही अनुपालन लागत, बाजार मंदी और कार्यशील पूंजी की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

  • उद्योग-स्तरीय जागरूकता एवं सहयोग की आवश्यकता

खेद जनक है कि, बड़े उद्योग संगठनों जैसे “FIPPI” तथा अन्य संस्थाओं ने अब तक व्यापारियों की सुरक्षा या जागरूकता के लिए अखिल भारतीय स्तर पर पर्याप्त पहल नहीं की है।

ABPLTA का मानना है कि प्रवर्तन शुरू करने से पहले व्यापक जागरूकता सेमिनार, SOP परिपत्र और संयुक्त दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए थे।

  • व्यापारियों की सुरक्षा हेतु ABPLTA के सुझाव

हम विनम्रतापूर्वक निम्नलिखित तत्काल उपायों का प्रस्ताव करते हैं:

  1. निर्माता स्तर पर प्राथमिक जवाबदेही
  • कार्रवाई फैक्ट्री स्तर पर होनी चाहिए, न कि डीलर काउंटर पर।
  • बिना लाइसेंस उत्पादन रोके बाजार में छापेमारी का कोई दीर्घकालिक उद्देश्य नहीं।
  1. अनिवार्य निर्माता द्वारा घोषणा

हर आपूर्ति के साथ होना चाहिएः

  • BIS लाइसेंस नंबर
  • बोर्ड पर ISI मार्किंग
  • बिल/डिलीवरी चालान पर लिखित घोषणा

इसके बिना व्यापारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

  1. अस्थायी संक्रमण अवधि
  • फैक्ट्रियों द्वारा BIS लाइसेंस पूर्ण करने तक व्यापारियों को ’’6-12 माह की छूट अवधि’’ दी जाए।
  1. केंद्रीय BIS सत्यापन पोर्टल / ऐप

BIS को एक सरल मोबाइल-आधारित सत्यापन प्रणाली शुरू करनी चाहिए, जिससे व्यापारी तुरंत ISI नंबर जांच सकें।

  1. राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम

BIS एवं उद्योग संघों द्वारा प्रमुख प्लाइवुड बाजारों में संयुक्त सेमिनार आयोजित किए जाएँ, जिनमें सिखाया जाएः

  • असली ISI मार्किंग की पहचान
  • आवश्यक कानूनी दस्तावेज
  • अनुपालन के नियम
  1. प्रवर्तन दल को लिखित निर्देश

स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएँ कि उचित खरीद बिल और घोषणा रखने वाले व्यापारियों को परेशान न किया जाए।

निष्कर्ष

’’व्यापारी राष्ट्र निर्माण के भागीदार हैं - अपराधी नहीं।’’

हम गुणवत्ता विनियमन का पूर्ण समर्थन करते हैं, परंतु उसका क्रियान्वयन व्यवस्थित, निष्पक्ष और फैक्ट्री-केंद्रित होना चाहिए। जब हजारों बिना लाइसेंस इकाइयाँ उत्पादन जारी रखें और दंड व्यापारियों को मिले - यह न तार्किक है, न टिकाऊ।

’’ABPLTA सभी संबंधित प्राधिकरणों एवं उद्योग संगठनों से आग्रह करता है कि ईमानदार व्यापारियों की सुरक्षा और विनिर्माण अनुपालन को सुदृढ़ करने हेतु संतुलित प्रवर्तन ढांचा तत्काल बनाया जाए।’’


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