भारत के प्लाईवुड एवं वुड पैनल उद्योग में ’’क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO)’’ का लागू होना एक महत्वपूर्ण परिवर्तन साबित हुआ है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण को बेहतर बनाना था, लेकिन इसके साथ ही विशेष रूप से MSME इकाइयों के सामने कई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं। इसका प्रमुख कारण यह था कि अधिकांश ISI मानक कई दशक पहले तैयार किए गए थे, जब प्लाईवुड का निर्माण मुख्य रूप से सीज़न्ड वन लकड़ी और पारंपरिक उत्पादन प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाता था। आधुनिक विनिर्माण परिस्थितियों में उन मानकों के कई प्रावधानों को लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन था।

इन चुनौतियों को समझते हुए ’’उत्तराखंड प्लाई मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UPMA)’’ ने, ’’नॉर्दर्न प्लाईवुड प्रोडक्ट्स’’ के पार्टनर ’’आदित्य अग्रवाल’’ के मार्गदर्शन में, नियामक आवश्यकताओं और उद्योग की वास्तविकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई।

QCO का विरोध करने के बजाय, एसोसिएशन ने “BIS, DPIIT, IWST” तथा अन्य उद्योग हितधारकों के साथ मिलकर मानकों को आधुनिक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में कार्य किया, जबकि गुणवत्ता मानकों को भी बनाए रखा। इस दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गईं, जिनमें सरकारी एवं तकनीकी संस्थाओं के साथ बैठकों में भागीदारी, ’’‘मानक मंथन’’’ कार्यक्रमों का आयोजन, विभिन्न राज्य स्तरीय संघों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए “BIS वर्किंग कमेटी’’ का गठन तथा BIS की तकनीकी समितियों “CED-20’’ और “CED-11’’ में सक्रिय योगदान शामिल हैं।

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इन प्रयासों के परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं:

IS 303 - जनरल पर्पज़ प्लाईवुड

एसोसिएशन ने बेंडिंग क्लास आवश्यकताओं तथा फेस वेनियर की मोटाई संबंधी मानदंडों को अधिक तर्कसंगत बनाने की दिशा में सफल प्रयास किए। इससे विभिन्न प्रकार की लकड़ियों और उत्पादन पद्धतियों से निर्मित भारतीय प्लाईवुड को मानक के अंतर्गत अधिक समावेशी रूप से शामिल किया जा सका।

IS 1659 - ब्लॉक बोर्ड

इस मानक में महत्वपूर्ण सुधारों के तहत अनिवार्य स्पॉट टेस्ट को हटाया गया, बेंडिंग क्लास की कठोर आवश्यकताओं को सरल बनाया गया तथा अत्यधिक सख्त टॉलरेंस में आवश्यक लचीलापन प्रदान किया गया। इससे उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखते हुए निर्माण प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक बन सकी।

IS 4990 - प्रिज़र्वेटिव ट्रीटेड प्लाईवुड

एसोसिएशन ने CCB और ACC प्रिज़र्वेटिव्स के लिए अनिवार्य रिटेंशन आवश्यकताओं को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उद्योग के अनुसार ये प्रावधान बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए व्यावहारिक नहीं थे।

IS 2202 - फ्लश डोर्स

वर्तमान में इस मानक के संशोधित संस्करण पर कार्य चल रहा है, जिसमें उत्पादन के उप-उत्पादों (By-products) का उपयोग करके निर्मित निम्न श्रेणी के फ्लश डोर्स को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे डैडम् इकाइयों को विशेष लाभ मिलने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

गुणवत्ता सुधार और मानक विकास में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए हाल ही में “BIS देहरादून’’ द्वारा UPMA को “Excellence in Quality Award” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार ’’उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी’’ द्वारा ’’नॉर्दर्न प्लाईवुड प्रोडक्ट्स’’ के पार्टनर एवं उत्तराखंड प्लाई मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव ’’संदीप गुप्ता’’ को प्रदान किया गया।

नियामक संस्थाओं और उद्योग जगत के बीच रचनात्मक सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए UPMA ने यह सिद्ध किया है कि प्रभावी मानकीकरण केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि सभी पक्षों की सहभागिता और संवाद से संभव होता है। ’’आदित्य अग्रवाल’’ के नेतृत्व और उद्योग के सक्रिय सहयोग से एसोसिएशन आज भारत के प्लाईवुड उद्योग को अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


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