Recommendations of GST Council

 

The 47th meeting of the Goods and Services Tax (GST) Council was perhaps one of the most important since the implementation of the new indirect tax regime. It not only marked the completion of five years of implementation, but also had a wide-ranging agenda. At this point, it is fair to argue that the system has not performed as expected. In this context, the Council had constituted four groups of ministers to look into different issues.

The Council accepted the report submitted by the group of ministers (GoM) headed by Karnataka Chief Minister Bommai on exemptions and correction of the inverted duty structure. The group was also expected to make recommendations on rate rationalisation for which it has been given an extension. Rate rationalisation is important as the current overall rate is not revenue neutral compared to the taxes subsumed in the GST, which has been one of the biggest reasons for revenue underperformance. The group’s recommendations on exemptions and correction in duty structure have been accepted, which should help improve collection.

The Council also accepted the recommendations of the GoM headed by Maharashtra Deputy Chief Minister Ajit Pawar on strengthening the GST system. The group, among other things, advocated better tracking of high-risk taxpayers. The GoM headed by Meghalaya Chief Minister Conrad Sangma, which looked into areas such as online gaming, casinos, and horse racing has been asked to reconsider the concerns raised by some states.

However, the biggest concern for some states was the end of the compensation regime.Extending the compensation payment, to be sure, would be fairly complicated. Besides amending the law, the Council would have to decide the growth rate at which the states will be compensated. Clearly, the 14 per cent growth assumption was not practical.

If the compensation is not extended, which is a strong possibility, recommendation in the context of rate rationalisation would become more important. Moving to the revenue-neutral rate with fewer slabs would help boost revenue for both Centre and states.

 


जीएसटी परिषद की अनुशंसाएं


वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 47वीं  बैठक शायद नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के क्रियान्वयन के बाद की सबसे महत्वपूर्ण बैठक थी. यह बैठक न केवल क्रियान्वयन के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई बल्कि इस बैठक का एजेंडा भी बहुत व्यापक था. फिलहाल यह दलील देना उचित होगा कि यह व्यवस्था अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी है. इस संदर्भ में परिषद ने चार मंत्री समूह गठित किए थे जो विभिन्न मसलों पर ध्यान देंगे.

परिषद ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई की अध्यक्षता वाले उस मंत्री समूह की वह रिपोर्ट स्वीकार कर ली है जो रियायतों और उलट शुल्क ढांचे में सुधार से संबंधित थी. आशा तो यह भी थी कि समूह दरों को तार्किक बनाने के बारे में निर्णय करेगा। इसके लिए उसे पहले ही अवधि विस्तार दिया गया था. दरों को तार्किक बनाना महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा समग्र दर जीएसटी में समाहित करों की तुलना में राजस्व प्रतिपूर्तिकारक नहीं है. राजस्व संग्रह में कमी की यह भी एक बड़ी वजह रही है. समूह ने रियायतों और शुल्क ढांचे में सुधार को लेकर जो अनुशंसाएं की उन्हें भी स्वीकार कर लिया गया. इससे भी संग्रह में सुधार होना चाहिए.

परिषद ने महाराष्ट्र के उपमुख़्यमंत्री अजित पवार की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह की अनुशंसाओं को भी स्वीकार किया. समूह ने अन्य बातों के अलावा यह कहा है कि उच्च जोखिम वाले करदाताओं की बेहतर ट्रैकिंग की जाए. मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनर्ड संगमा की अध्यक्षता वाला मंत्री समूह ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो तथा घुड़दौड़ आदि से संबंधित था और उसने कुछ राज्यों द्वारा जतायी गयी चिंताओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है.

बहरहाल, कुछ राज्यों के लिए सबसे बड़ी चिंता थी क्षतिपूर्ति की व्यवस्था का समाप्त होना.क्षतिपूर्ति भुगतान बढ़ाना वास्तव में जटिल होगा। कानून में संशोधन के अलावा इसके लिए परिषद को यह भी तय करना होगा कि राज्यों को किस वृद्धि दर के हिसाब से क्षतिपूर्ति दी जाएगी. स्पष्ट है कि 14 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर व्यावहारिक नहीं थी.

जैसी की संभावना भी है, अगर क्षतिपूर्ति नहीं बढ़ायी गई तो दरों को तार्किक बनाने संबंधी अनुशंसाएं और महत्वपूर्ण हो जाएंगी। कम स्लैब के साथ राजस्व प्रतिपूर्ति दर हासिल करने से केंद्र और राज्य दोनों का राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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