कैबिनेट सचिवालय के हस्तक्षेप के बाद सरकारी विभाग और मंत्रालय गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) में सुधार के लिए सक्रिय हो गए हैं।

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने क्यूसीओ को रद्द, निलंबित और स्थगित करने पर रिपोर्ट पेश की थी।

समिति ने एक आंतरिक रिपोर्ट में 200 से अधिक उत्पादों के लिए क्यूसीओ को रद्द, निलंबित और स्थगित करने का प्रस्ताव दिया था। इसमें चिंता जताई गई थी कि इन आदेशों ने अनुपालन बोझ बढ़ा दिया है और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है। इससे भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को नुकसान हो रहा है।

रिपोर्ट में इन 200 उत्पादों में से सरकार को उद्योग पर दबाव कम करने के लिए प्लास्टिक, पॉलिमर, बेस मेटल, फुटवियर और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों जैसी प्रमुख सामग्री को कवर करने वाले 27 क्यूसीओ को रद्द करने की सिफारिश की गई थी। यह कार्रवाई संबंधित मंत्रालयों को लागू करनी थी। इनमें कपड़ा मंत्रालय, रसायन और उर्वरक विभाग, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, इस्पात मंत्रालय, खान मंत्रालय और अन्य विभाग शामिल हैं।

कुछ सरकारी विभागों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। उदाहरण के लिए पेट्रोलियम और उर्वरक मंत्रालय ने 12 नवंबर के आदेश में प्लास्टिक और सिंथेटिक फाइबर से संबंधित 14 उत्पादों पर क्यूसीओ को रद्द कर दिया।

इसके बाद 13 नवंबर को खान मंत्रालय ने टिन, एल्यूमीनियम, सीसा, जस्ता, निकल और तांबा सहित सात उत्पादों पर क्यूसीओ हटा दिया। इस्पात मंत्रालय और डीपीआईआईटी ने भी क्यूसीओ पर पिछले कुछ हफ्तों में गहन हितधारक परामर्श आयोजित किए हैं।

हालांकि कुछ विश्लेसकों द्वारा यह आशांका भी जताई गई कि, ‘पॉलिमर, फाइबर, धातु और इंटरमीडिएट के लिए जहां क्यूसीओ वापस लिए गए हैं, वहीं वैश्विक आपूर्तिकर्ता कम कीमतों पर अतिरिक्त इन्वेंट्री भेजने का प्रयास कर सकते हैं।

इस बीच सरकार ने वियतनाम से स्टील के आयात पर एंटी डंपिंग शुल्क लगा दिया है। सरकार ने वियतनाम में तैयार एलॉय या गैर एलॉय स्टील के हॉट रोल्ड फ्लैट्स उत्पादों पर यह शुल्क लगाया है। इसका मकसद घरेलू उत्पादकों को अनुचित मूल्य पर आयात किए गए स्टील से सुरक्षा प्रदान करना है।


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