हाल ही में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर हुई एक घटना ने कई व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है और समुद्री परिवहन दुर्घटनाओं में पारदर्शिता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोचिन (कोच्चि) से लोड होकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचे कई कंटेनर बुरी तरह क्षतिग्रस्त और टेढ़े-मेढ़े पाए गए, जिससे स्पष्ट था कि परिवहन के दौरान वे किसी दुर्घटना का शिकार हुए थे। इसके बावजूद न तो पोर्ट अधिकारियों और न ही शिपिंग एजेंटों ने प्रभावित व्यापारियों को इस घटना की कोई पूर्व सूचना दी। इतना ही नहीं, दोनों ने इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी लेने से भी इनकार कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित जहाज पर लगभग 40 से 80 कंटेनर क्षतिग्रस्त हुए थे। इन कंटेनरों में प्लाईवुड, रसायन, पेपर रोल तथा अन्य सामान लदा हुआ था। समुद्री पानी कंटेनरों के अंदर प्रवेश करने के कारण माल को 25 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा।

ऐसी घटनाएं सामान्यतः तब होती हैं जब अत्यधिक भार (ओवरलोडिंग) या दो जहाजों की टक्कर के कारण कंटेनर समुद्र में गिर जाते हैं। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस प्रकार की गंभीर घटनाओं को मुख्यधारा की मीडिया में शायद ही कभी स्थान मिलता है।

अपना अनुभव साझा करते हुए अहमदाबाद के एक व्यापारी ने बताया कि उसके तीन कंटेनरों में से एक पूरी तरह नष्ट हो गया, जबकि शेष दो कंटेनरों में रखा लगभग 25 प्रतिशत प्लाईवुड समुद्री पानी से खराब होकर बिक्री योग्य नहीं रहा। उन्होंने बताया कि केरल की फैक्ट्रियां पूर्ण भुगतान प्राप्त होने के बाद ही माल भेजती हैं, लेकिन बीमा (इंश्योरेंस) केवल बिल मूल्य तक सीमित होने के कारण इस प्रकार के नुकसान का बड़ा हिस्सा अंततः खरीदार व्यापारियों को ही वहन करना पड़ता है।

व्यापारी ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी गंभीर समुद्री दुर्घटनाओं की जानकारी मीडिया में क्यों नहीं दी जाती, और पोर्ट अधिकारी तथा शिपिंग एजेंट अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बजाय प्रभावित व्यापारियों को स्पष्ट जानकारी और सहयोग क्यों नहीं प्रदान करते।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि शिपिंग कंपनियां व्यापक बीमा सुरक्षा (Comprehensive Insurance Cover) के साथ कार्य करती हैं, तो प्रभावित व्यापारियों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा क्यों नहीं दिया जाता? यह घटना समुद्री लॉजिस्टिक्स और शिपिंग उद्योग में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी मुआवजा व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर करती है।