देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में एकीकरण की रफ्तार तेज होने वाली है क्योंकि ग्राहकों का रुझान ग्रेड ए डेवलपरों की ओर बढ़ रहा है। इस श्रेणी के डेवलपर बिना किसी देरी के ग्राहकों को तय समय पर मकान सौंप रहे हैं।

इक्रा के अनुसार, प्रमुख सूचीबद्ध डेवलपरों की बाजार हिस्सेदारी कुल बिक्री मूल्य के प्रतिशत में बढ़ी है। प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि पर्याप्त रकम के साथ स्थापित कंपनियों के पास आने वाले वर्षों के दौरान 50 फीसदी से अधिक इन्वेंट्री होगी।

नए डेवलेपरों की पिछली कारगुजारियों के कारण यह एकीकरण हो रहा है। ऐसा नहीं है कि लोगों ने उन्हें अवसर नहीं दिए। लेकिन रेरा आने के बाद डेवलपरों की जवाबदेही काफी बढ़ गई है और सरकार का रुख भी काफी सख्त है। इससे व्यवस्था बदल रही है।

कई रिहायशी परियोजनाओं में न केवल देरी हुई बल्कि कुछ डेवलेपरों ने बैंक ऋण की अदायगी में भी चूक की है। उन्होंने सैकड़ों मकान खरीदारों को वित्तीय संकट में धकेल दिया और कुछ लोगों की जीवन भर की बचत उनकी अधूरी परियोजनाओं में फंस गई। ऐसे में राहत के लिए ग्राहकों को सरकार और अदालतों से गुहार करनी पड़ी। तभी से इस क्षेत्र के लिए सख्त मानदंड तैयार किए गए और रियल एस्टेट विनियमन अधिनियम (रेरा) को लागू किया गया।

रेरा, ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), बाजार नियामक सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए अन्य उपायों के साथ नियामकीय सुधारों से यह सुनिश्चित हुआ है कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी बाजार में केवल अनुशासित एवं पेशेवर नजरिये वाले डेवलपर ही सफल होंगे।

नीतिगत सुधारों ने उन डेवलपरों को बाजार से बाहर करने में मदद की है जो भरोसेमंद नहीं थे और नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे थे। ऐसे डेवलपरों को आखिरकार बाजार से बाहर होना पड़ा और इससे असंगठित क्षेत्र को औपचारिक बनाने में मदद मिली।

साल 2017 में सभी ब्रांडेड कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 17 फीसदी थी। मगर आज यह आंकड़ा बढ़कर 35 फीसदी से अधिक हो चुका है। अगले कुछ वर्षों में इसके 50 फीसदी के पार पहुंचने की उम्मीद है। हो सकता है आने वाले दिनों में बड़ी कंपनियां छोटी का अधिग्रहण कर लेंगी।

कोविड के बाद रियल एस्टेट में आई तेजी के बीच कंपनियों की प्री-सेल्स ग्रोथ यानी परियोजना पूरी होने से पहले हुई बिक्री में वृद्धि भी बाजार में मजबूती की ओर इशारा करती है। शीर्ष डेवलपरों की वृद्धि की झलक उनके बाजार पूंजीकरण में भी मिलती है।