उत्पादकता को मापने के ज्यादातर तरीके उस दौर के हिसाब से बने हैं जब औद्योगिक अर्थव्यवस्था का दौर था। कारखानों में इंसानी दिमाग का इस्तेमाल कम होता था और अधिकांश काम मानव श्रम से जुड़ा होता था। उस वक्त अगर किसी कंपनी को अधिक सामान बनाना होता था, तो कंपनी को ज्यादा लोगों को नौकरी पर रखना पड़ता था, ज्यादा मशीनें लगती थी, या फिर कर्मचारियों से अधिक घंटे काम करवाया जाता था।

एआई इस मॉडल से मेल नहीं खाता। यह बिना ज्यादा लोगों को नौकरी पर रखे या ज्यादा वक्त लगाए, सोचने समझने में मदद करता है। नतीजतन इसके कई फायदे आंकड़ों में साफतौर पर नहीं दिखते लेकिन ये फायदे कंपनियों को मिल जाते हैं।

अगर आप गहराई से देखेंगे, तो व्यक्तिगत स्तर के कामों में एआई का असर ज्यादा होता है। एआई की वजह से काम करने की रफ्तार औसतन 14 फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही, कम होती हैं और काम जल्दी पूरा होता है और आपस में तालमेल भी बेहतर होता है।

ये फायदे भी बहुत मायने रखते हैं। लेकिन ज्यादातर ये आंकड़े उत्पादन बढ़ोतरी के रूप में नहीं दिखते हैं। कंपनियां इनका इस्तेमाल काम को जल्दी पूरा करने, जवाब देने के तरीकों में एकरूपता लाने और आंतरिक स्तर के कामकाज को आसान बनाने के लिए करती हैं।

ऊपर से देखने में लगता है कि उत्पादन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अंदर ही अंदर काम करने का तरीका बदल जाता है। तेजी से काम पूरा होने का फायदा, अधिकांशतः निश्चित कीमत अनुबंध, मुनाफे की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण में दिखता है, लेकिन उत्पादकता में बढ़ोतरी नजर नहीं आती।

एआई मुख्य रूप से समय बचाता है लेकिन श्रम नहीं। यह ड्राफ्ट तैयार करने, सर्च करने, त्रुटियां सुधारने, सारांश तैयार करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।

उत्पादन में इसका उपयोग मुख्यतः उत्पादन के दौरान कमीयां ढूढ़ने में, कच्चे माल और तैयार उत्पाद की इन्वेन्ट्री का डाटा तैयार करने में सटीकता से किया जा सकता है।

हालांकि, उत्पादकता के आंकड़े प्रति घंटे काम से होने वाले श्उत्पादनश् में बदलाव को मापने के लिए बने हैं, न कि इस बात को मापने के लिए कि अनिश्चितता कितनी जल्दी दूर हुई या समन्वय के स्तर में कितना सुधार हुआ।

इसमें एक और अनदेखा पहलू भी है। उत्पादकता विश्लेषण का पूरा ध्यान श्औसतश् पर होता है जबकि एआई का सबसे निरंतर प्रभाव श्विविधताश् में है। कर्मचारियों में सबसे अधिक सुधार देखा जाता है। गलतियां कम होती हैं और परिणाम अधिक विश्वसनीय हो जाते हैं।

कंपनियों के लिए, उच्च औसत उत्पादन के साथ-साथ विश्वसनीयता और निरंतरता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण होती है।

आज एआई भी काम करने के तरीके को कहीं अधिक तेजी से बदल रही है। भारत के लिए यह बात बहुत मायने रखती है। एआई बहुत ही खामोशी से छोटे-छोटे बदलावों के जरिए समय के साथ इकट्ठा होकर व्यापक असर दिखाएगी ।