केंद्र सरकार मौजूदा गिरफ्तारी के मामलों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने हेतु राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी। इसके अलावा, GST रिफंड के लिए जोखिम आकलन प्रक्रिया की राज्यों के साथ हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी।

GST परिषद ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम की ’’धारा 69 को हटाने की सिफारिश की है’’, जो निर्दिष्ट मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान करती है। इसके साथ ही, अभियोजन (Prosecution) शुरू करने की मौद्रिक सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की भी सिफारिश की गई है।

ये प्रस्ताव GST के तहत आपराधिक प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाने और कारोबारियों के लिए मुकदमेबाजी कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। उद्योग जगत ने बड़ी संख्या में अपराधों को अपराधमुक्त करने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, उद्योग ने यह भी कहा है कि मौजूदा मामलों के निपटारे का तरीका इस व्यवस्था को लागू करने में एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।

GST परिषद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कर अधिकारियों के पास गिरफ्तारी की शक्ति नहीं होगी। हालांकि, जारी मामलों में निरंतरता और एकरूपता बनाए रखने के लिए हमें राज्यों के साथ समन्वय करना होगा। क्योंकि SOP पर अभी काम चल रहा है, और इसके लिए अभी और चर्चा की आवश्यकता है।

सरकार 1 अप्रैल 2027 से इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम (Invoice Management System) को अनिवार्य बनाने की भी योजना बना रही है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) इनवॉइस मिलान की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए सिस्टम में आवश्यक उन्नयन कर रहा है, ताकि मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश न्यूनतम रह जाए।

नए प्रावधानों को लागू करने के लिए 1 अप्रैल 2027 की तारीख इसलिए तय की गई है, क्योंकि प्रस्तावित बदलावों के लिए मौजूदा नियमों और कानूनों में लगभग एक दर्जन संशोधन करने होंगे। जिन बदलावों के लिए केवल नियमों में संशोधन की आवश्यकता है, उन्हें पहले लागू किया जा सकता है, जबकि कुछ संशोधनों के लिए संसद की मंजूरी जरूरी हो सकती है।

घोषणा के बाद केंद्र सरकार जमीनी स्तर पर नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी। इसमें जोखिम आकलन के आधार पर कारोबारियों को ’’90% रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)’’ उपलब्ध कराने के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

रिफंड प्रक्रिया को विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में एकसमान तथा जरूरतों के अनुरूप बनाए रखने के लिए परिषद हर तीन महीने में राज्यों के साथ रिफंड संबंधी जोखिम आकलन की समीक्षा करेगी।