अब कर अधिकारियों को कई वर्षों का जोड़कर, एक ही साथ कर देयता का नोटिस जारी करने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें प्रत्येक साल के कर मांग का ब्योरा देना होगा।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी कई सर्कुलर में से एक में, कर अधिकारियों को कई साल के एक नोटिस में वित्त वर्ष के मुताबिक, अलग अलग मांग का स्पष्ट रूप से उल्लेख करने का निर्देश दिया है, ताकि करदाता इसे समझ सकें और उचित प्रतिक्रिया दे सकें।

सर्कुलर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कारण बताओ नोटिस, अधिनिर्णय आदेशों और अपीलों के लिए मूल मानक निर्धारित किया गया है, ताकि कार्यवाही स्पष्ट और निष्पक्ष हो।

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नोटिस में, अब तथ्यों, साक्ष्यों, कानूनी प्रावधानों और मांगे जा रहे कर की सटीक राशि का उल्लेख करना होगा। केवल कानून की धाराओं का उल्लेख पर्याप्त नहीं है।

अधिकारी धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयानी या तथ्यों को छिपाने के लिए बनाए गए सख्त प्रावधानों को, केवल इसलिए लागू नहीं कर सकते, क्योंकि कर का भुगतान नहीं किया गया है या कोई विसंगति पाई गई है। उन्हें नोटिस में ही कर चोरी के इरादे के विशिष्ट प्रमाण दिखाने होंगे।

फैसले संबंधी आदेशों में करदाता द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए। इसमें श्जवाब पर विचार किया गयाश् जैसी एक पंक्ति स्वीकार्य नहीं होगी। अधिकारियों को यह समझाना होगा कि उन्होंने करदाता द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण क्यों स्वीकार या अस्वीकार किया है। व्यक्तिगत सुनवाई सार्थक होनी चाहिए, और आभासी सुनवाई को प्रोत्साहित किया जाता है।


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