पहले समृद्धि, फिर बाकी लक्ष्य
- अक्टूबर 26, 2026
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अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी। लेकिन यह आंकड़ा एक चेतावनी भी है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, भारत को अपने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए दो दशकों से अधिक समय तक औसतन 7.8% की विकास दर बनाए रखनी होगी।
दुर्भाग्य से, विकसित भारत का 2047 का लक्ष्य वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने की जलवायु संबंधी प्रतिबद्धता से प्रभावित हो सकता है। ये दोनों लक्ष्य परस्पर विरोधी दिशाओं में काम करते हैं। एक भारतीयों के लिए अधिक अवसरों का वादा करता है, जबकि दूसरा अधिक लागत और धीमी आर्थिक वृद्धि का कारण बन सकता है।
नीति आयोग की 11 खंडों वाली रिपोर्ट का अनुमान है कि वर्ष 2070 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के लिए भारत को अतिरिक्त निवेश के रूप में 8.1 लाख करोड़ डॉलर खर्च करने होंगे। यह राशि मौजूदा जीडीपी के बराबर दो वर्षों के उत्पादन को छोड़ने या आधी सदी तक हर साल वर्तमान जीडीपी का 4% खर्च करने के समान है।
रिपोर्ट स्वीकार करती है कि नेट ज़ीरो के कारण ऊर्जा की लागत तेजी से बढ़ेगी, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित होगा। अर्थशास्त्र के अध्ययन आम तौर पर बताते हैं कि ऐसे अप्रत्यक्ष प्रभाव काफी बड़े हो सकते हैं। वहीं हरित अभियान चलाने वाले लोग तर्क देते हैं कि जलवायु परिवर्तन 21वीं सदी की उन अनेक समस्याओं में से एक है, जिनका समाधान जरूरी है। हालांकि, समाचारों में अक्सर इसे जरूरत से अधिक प्रमुखता दी जाती है।
भले ही भारत भारी लागत उठाकर वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो हासिल कर ले, फिर भी इससे जलवायु को लगभग नगण्य लाभ मिलेगा। वर्तमान नीतियों के तहत भारत के कुल उत्सर्जन और नेट ज़ीरो नीति के तहत अनुमानित उत्सर्जन को लेकर संयुक्त राष्ट्र के जलवायु मॉडल ‘मैजिक’ (MAGICC) में विश्लेषण किया जाए, तो सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में दोनों परिदृश्यों के बीच का अंतर केवल 0.16 डिग्री सेल्सियस होगा, जिसे मापना भी मुश्किल है।
इसके अलावा, वर्ष 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए भारत को आर्थिक विकास पर असाधारण रूप से ध्यान केंद्रित करना होगा और अनुकूल परिस्थितियों की जरूरत होगी। जीडीपी के 4% के बराबर संसाधनों का लगातार खर्च इस लक्ष्य को खतरे में डाल सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु पैनल के मध्यम अनुमान वाले परिदृश्य के अनुसार, इस सदी के अंत तक औसत भारतीय आज की तुलना में 791% अधिक समृद्ध होगा। उच्च आय वाला देश बनने के कई लाभ होंगे। इसीलिए भारत को विकसित भारत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह लक्ष्य कई ऐसी नीतियों के माध्यम से हासिल किया जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक अपने स्तर पर प्रभावी हो। अत्यधिक कठोर जलवायु नीतियां दूर भविष्य के जोखिमों में बहुत मामूली कमी ला सकती हैं, जबकि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कहीं कम लागत पर तत्काल और बड़े परिणाम दे सकती हैं।
भारत को विकसित भारत के लक्ष्य को पूरी ताकत से आगे बढ़ाना चाहिए। आर्थिक विकास को गति देने के लिए अत्यधिक प्रभावी नीतियों में निवेश करना चाहिए।
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