एक नए शोध में कहा गया है कि भारत भर में हर साल एक से डेढ़ करोड़ नए एसी लगते हैं। इस तरह से अगले दशक में 13-15 करोड़ एसी और लगाए जाने की संभावना है।

यदि सरकार कोई नई नीति लागू नहीं करती है तो 2030 तक 120 गीगावाट और 2035 तक 180 गीगावाट तक बिजली की मांग बढ़ सकती है। यह अनुमानित राष्ट्रीय चरम मांग का 30 प्रतिशत से अधिक है।

शोध कहता हैं, “एसी पहले से ही चरम मांग में 60-70 गीगावाट का और इजाफा कर रहे हैं। यह सूर्यास्त के बाद ग्रिड की क्षमता से ज्यादा हो जाता है।“

यदि सरकार नीतिगत हस्तक्षेप नहीं करती है तो ब्लैकआउट का खतरा तो बढ़ेगा ही, बिजली महंगी भी होगी, लेकिन बेहतर नीतियों के जरिए उपभोक्ताओं, निर्माताओं और ग्रिड सभी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।


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