पश्चिम एशिया संकट ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले रखा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन फिर भी फर्क है और बहुत अधिक है।

महंगे होते कच्चे तेल से त्रस्त, विश्व के सभी देशों ने खुदरा दरों में तत्काल वृद्धि कर, पूरा खर्च उपभोक्ताओं पर ही डाला है। अमेरिका में उपभोक्ताओं ने पेट्रोल पर पिछले साल में जितना खर्च किया था, उतना या उससे भी ज्यादा इस सााल सिर्फ तीन महीनों (मार्च से मई) में खर्च दिए हैं। भारत में तो दर बढ़ने की अभी सिर्फ शुरुआत ही हुई है।

अकेले सिर्फ ईंधन महंगा होने पर इसका असर अन्य किन किन वस्तुओं पर नहीं पड़ेगा, इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।. और यहीं से निकलती है महंगाई के अगले दौर की आशंका, जो व्यापार को मंदी में धकेल सकती है।

भारतीय सरकार के साथ साथ, जनता ने भी, कोविड महामारी जैसे दुर्दान्त संकट को, धैर्य, समझदारी और परिपक्वता से पार कर लिया था।

परिस्थितियों से निपटने के सबके अलग-अलग सोच और तरीके होते हैं। मेरी धारणा है कि 2026 का वर्श सभी के लिए बहुत चुनौतिपूर्ण रहने वाला है। इसी संदर्भ में मेरी तीन निर्माताओं से चर्चा हुई। हालांकि तीनों निर्माता अलग-अलग सेक्टर से थे। एक मशीन निर्माता थे एक लेमिनेट उत्पादक थे तो एक शटरिंग प्लाई उत्पादक थे। तीनों की प्रतिक्रिया अलग-अलग थी, नजरिया अलग था, दृष्टिकोण अलग था।

पहले महानुभाव ने ठंडी सांस भरते हुए चिन्तीत स्वरों में कहा कि अभी तो सिर्फ तीन ही महीने निकले हैं। अगले नौ महीनों में तो उद्योगपतियों का दम ही निकल जाएगा।

लेकिन वहीं अन्य दोनों के उत्साहवर्द्धक सामयिक विचारों को भी देखें जिनसे सभी को प्रेरणा मिलेगी।

दूसरे ने गम्भीरता से सोचते हुए कहा कि इसका मतलब है कम्पिटिसन और भी ज्यादा बढ़ जाएगा। हमें अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए और अधिक प्रयास करने पड़ेंगे। मेहनत बढ़ेगी, मार्जिन घटेंगे, लेकिन नए ग्राहक तक पहुंचेंगे और उन्हें जोड़ेगे।

तीसरे ने शांत स्वर में कहा कि अब हमें 2027 के लिए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ त्-क् के लिए भी समय मिल पाएगा, जिसे हम रूटिन वर्क में फंसने के कारण, कर नहीं पा रहे थे। अब हम और अधिक मजबूती के साथ 2027 के लिए तैयार रहेंगे।

समय का यह दौर, हमें 2027 में और भी अधिक मजबूती से तैयार होने में मदद करेगा।

Suresh Bahety | 9050800888