सरकार की एमएसएमई में कार्बन उत्सर्जन कम करवाने की योजना
- अगस्त 11, 2025
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सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को हरित बनने और ऐसी तकनीकें अपनाने में मदद के लिए वित्तिय प्रोत्साहन देने और विनियामक छूट प्रदान करने की योजना बना रही है जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती हैं।
एमएसएमई भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 30 प्रतिशत से अधिक और भारत से कुल निर्यात में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।
यह क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जा और उत्सर्जन-गहन है, जिससे सरकार डैडम् के कार्बन पदचिह् और जीवाश्म ईंधन पर उच्च निर्भरता को कम करने के लिए हरित विकल्पों की तलाश करने जा रही है।
जिन उपायों पर विचार किया जा रहा है उनमें उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य निर्धारित करना, हरित ईंधन और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना, और कुशल कार्यबल का एक समूह बनाना शामिल है जो इस क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है।
यह सरकार के 2070 के शुद्ध शून्य लक्ष्य के अनुरूप एमएसएमई सहित अन्य क्षेत्रों को कार्बन मुक्त करने के दृष्टिकोण का हिस्सा है।
भारत में कुल औद्योगिक उत्सर्जन में एमएसएमई का योगदान 10-15 प्रतिशत है। देश में कुल ब्व्2 उत्सर्जन में उनका योगदान 3-4 प्रतिशत है।
कार्बन उत्सर्जन का बड़ा हिस्सा पंप, मोटर, बॉयलर और जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा उत्पादन से आता है।
इसलिए, शमन प्रयासों में ऊर्जा दक्षता, वैकल्पिक ईंधन के उपयोग, ग्रिड को हरित बनाने, एक परिपत्र अर्थव्यवस्था को अपनाने और साथ ही उनकी प्रक्रियाओं में उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में निर्देशित करने की आवश्यकता है।
एमएसएमई मंत्रालय एक हरित योजना भी लेकर आएगा, जिसमें पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं के लिए ई-मार्केटप्लेस बनाना, सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाएं स्थापित करना और डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण स्थापित करना जैसे पहलुओं को शामिल होंगे।
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