क्या है विकसित भारत की राह?
- अगस्त 11, 2025
- 0
जब से ‘2047 तक विकसित भारत‘ का नारा दिया है तभी से बहस-मुबाहिसे चल रहे हैं कि देश संपन्न कैसे हो। कोई देश कैसे धनवान बनता है इस पर पूरी दुनिया में बहस चलती रहती है। इसकी वजह यह है कि दुनिया में कुछ ही संपन्न देश हैं और उनके चारों ओर ऐसे देशों का जमावड़ा है, जो संघर्ष कर रहे हैं।
विश्व बैंक ने विभिन्न देशों को निम्न आय, निम्न-मध्यम आय, उच्च-मध्यम आय और उच्च आय की श्रेणीयों में बांटा है। उसके हिसाब से दुनिया में 58 देश उच्च आय की श्रेणी में आते हैं मगर उनमें भी आपस में बहुत अंतर है।
भारत को निम्न-मध्यम आय वर्ग में रखा गया हैं, जिसमें कुल 52 देश हैं। इनके बाद 54 देश उच्च-मध्यम आय वाले हैं। संक्षेप में, छोटे द्वीपों और टैक्स हेवेन को छोड़ दें तो 70 प्रतिशत दुनिया को धनी नहीं कहा जा सकता।
इसका मतलब है कि कोई भी देश किसी नियम की वजह से धनवान नहीं बनता बल्कि संपन्न देश अपवाद होते हैं। क्या भारत अतीत को छोड़कर विकसित देशों की कतार में शामिल हो सकता है?
अतीत बताता है कि पिछले 80 साल में ज्यादातर देश आय वर्ग की सीढ़ी पर केवल एक पायदान ऊपर पहुंच पाए हैं। जो देश आज धनी हैं, वे 19वीं सदी की शुरूआत में ही ऐसा कर पाए हैं। हां, उन्हें इस बात का श्रेय देना होगा कि वे आज भी संपन्न बने हुए हैं।
सच यह है कि जैसे पश्चिम यूरोप के देश लुढ़ककर मध्यम आय की श्रेणी में नहीं गिरे वैसे ही निम्न आय वाले देशों के लिए उछलकर उच्च आय वाली जमात में पहुंचना लगभग असंभव रहा है।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद चार देश ही ऐसे रहे हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था ने इतनी तेज रफ्तार भरी और इतने लंबे अरसे तक दौड़ती रही कि वे युद्ध की विभीषिका से उबरकर खुद को संपन्न देशों की जमात में ले आए। अपने जुझारूपन की बदौलत अपनी किस्मत बदलने वाले ये देश ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर हैं।
चीन अब भी संपन्न राष्ट्र नहीं बन पाया है। वह उच्च-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में है। उसका वृद्धि धीमी पड़ गई है और वह मध्यम आय के जाल से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। कुछ देश थोड़ा ऊपर उठकर उच्च-मध्यम आय वर्ग में पहुंच गए हैं, लेकिन वे विकसित कहलाने की हैसियत अभी हासिल नहीं कर पाए हैं।
तो हम किस वजह से यह भरोसा कर सकते हैं कि भारत वह हासिल कर सकता है, जो मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये और मेक्सिको हासिल नहीं कर पाए हैं?
तेज आर्थिक वृद्धि की गुत्थी सबसे अच्छी तरह सुलझाने वाला मॉडल आर्थिक राष्ट्रवाद का एक खास रूप है, जिसमें नए उद्योगों को विस्तार के लिए संरक्षण दिया जाता है, सबसे अच्छी प्रौद्योगिकी का आयात किया जाता है और निर्यात में अग्रणी बनने के लिए देश के भीतर होड़ बढ़ाई जाती है।
20वीं सदी में असाधारण वृद्धि हासिल करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यही एकसमान बात नजर आती है। बेहतरीन नवाचार के अलावा इस मॉडल का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व नाकाम संस्थाओं को खत्म करना है चाहे वे सरकारी हों या निजी। इस तरह बाजार में वे संस्थाएं ही रह जाती हैं, जिनमें होड़ करने की क्षमता होती हैै।
हकीकत यह है कि सभी देशों ने इस आर्थिक नीति को अपनाने की कोशिश की है। लेकिन अधिकतर ने इस पर आधा-अधूरा या बेदिली से अमल किया। इसीलिए वे उच्च वृद्धि दर हासिल करने में पिछड़ गए।
भारत के पास औद्योगिक संरक्षण था, लेकिन 1991 तक देश के भीतर प्रतिस्पर्धा कमजोर या नहीं के बराबर थी, जिस कारण वह ऊंची वृद्धि दर हासिल करने में पिछड़ गया। भारत ने पिछडे़ इलाकों के विकास का न्यायोचित मॉडल अपनाया। भारत ने निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र शुरू तो किए मगर उन्हें उस जोश के साथ रफ्तार नहीं दें पाया, जिस तरह चीन ने उन्हें आगे बढ़ाया। भारत ने विदेशी प्रौद्योगिकी के लिए अपने दरवाजे तो खोले, लेकिन स्थानीय निर्यात श्रंृखला को मजबूत करने की कोई ठोस नीति नहीं अपनाई गई।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी नीति एकदम सटीक नहीं हो सकती। शुरूआत में कोई न कोई खामी रह ही जाती है। असली जिंदगी में काम करते हुए हमें जवाबदेही, सच्ची प्रतिक्रिया और जरूरत के मुताबित तेजी से सुधार की आवश्यकता होती है। विजित और पराजित इसी से तय होते हैं।
भारत की नियोजित अर्थव्यवस्था में जब अकुशलता और भ्रष्ट्राचार घुसने लगा तो सुधार नहीं किया गया, अकुशल को खत्म नहीं किया गया और बढ़िया काम को प्रोेत्साहन नहीं दिया गया। दुख की बात यह है कि अब भी हमें इसका कोई हल नहीं मिला है।
D.Basu
👇 Please Note 👇
Thank you for reading our article!
If you don’t received industries updates, News & our daily articles
please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.






Ply insight launched on March 2018 with a vision to make a platform to collaborate plywood MDF, Laminate, machinery manufactures with dealers in the Trade.
Categories
Useful Links
Follow Us