हमें यह स्वीकार करना होगा कि दुनिया अब पहले की तुलना में अधिक संघर्षपूर्ण हो चुकी है। इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत, हमारे सोचने के तरीके में बदलाव की है।

यूक्रेन और ईरान से जुड़े युद्धों से एक और महत्त्वपूर्ण सबक मिलता है कि केवल मजबूत होना पर्याप्त नहीं है। विशेषतौर पर तब, जब विरोधी पक्ष युद्ध की आंच को नागरिक और औद्योगिक ढांचे तक फैलाने में सक्षम हो।

रूस ने व्यवस्थित तरीके से यूक्रेन के बिजली तंत्र और अन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट किया है, जबकि इजरायल ने भी गाजा में इसी तरह के हमले किए। अब ईरान भी, केवल अमेरिका और इजरायल के सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि कई देशों के नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहा है, जैसे कि कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, कुवैत, इराक, ओमान और यहां तक कि सऊदी अरब तथा साइप्रस को भी।

यदि औद्योगिक और नागरिक ढांचे को लक्षित किया जाता है, मसलन बिजली, रिफाइनरी या जल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसके मायने है कि दुनिया अब सुरक्षित नहीं है और हमें किसी भी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग का असर अब भारत की फैक्टरियों पर भी नजर आने लगा है। बड़ी विनिर्माण कंपनियों से लेकर सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रमों तक तमाम कंपनियां उत्पादन के मामले में बहुत अधिक संघर्ष कर रही हैं। सभी को ईंधन में कमी और कच्चे माल के कार्गों में देरी के कारण, उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। पेनल उद्योग में परिवहन लागत के साथ-साथ विभिन्न रसायनों में तेजी से, उत्पादन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।

उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि कई इकाइयों ने युद्ध से पहले की तुलना में, उत्पादन को 30-50 प्रतिशत तक कम कर दिया है।

महंगाई की अनिश्चितता को देखते हुए, बाजार में खरीदारी पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जनता द्वारा सिर्फ आवश्यक वस्तुओं पर ध्यान देने की वजह से, पेनल उत्पादों की मांग कमजोर रहने की चिंता बनी हुए है, जो उत्पादकों को मूल्य वृ़द्धि पर नियंत्रण रखने को मजबूर करेगी।

किसे पता है कि यह जंग कितनी लंबी चलेगी? यह लड़ाई कैसे खत्म होगी?

युद्ध कैसे समाप्त होता है, यह उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि युद्ध कब समाप्त होता है।

वर्तमान संकेतों के आधार पर, अमेरिका की शर्तों पर युद्ध समाप्त होने की संभावना नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट की राह जल्दी नहीं खुलेगी और वहां से गुजरने वाले जहाजों के बीमा की बहाली में वक्त लगेगा।

बंद पड़ी रिफाइनरीज में सामान्य उत्पादन दोबारा शुरू होना एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर ईरान सरकार बनी रही तो खाड़ी देश, जिन्होंने तेल से हटकर पर्यटन और वित्त में विविधता लाने की कोशिश की है, वे भी प्रभावित होंगे।

संक्षेप में, संघर्ष समाप्त होने का मतलब यह नहीं होगा, कि जल्द ही पुरानी सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी; कुछ मामलों में तो, यह बिल्कुल भी बहाल नहीं होगी।

किसी भी परिस्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण नुकसान होगा, जिसकी भरपाई करना चुनौतिपूर्ण रहने वाला है।

 

Suresh Bahety | 9050800888


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