पिछले एक दशक में भारत ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। बैंक खातों के विस्तार, डिजिटल भुगतान प्रणाली और ऋण व बीमा तक आसान पहुंच के माध्यम से करोड़ों लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा गया है। हालांकि इस सफलता के बावजूद, अभी भी कई परिवारों में वित्तीय परिपक्वता की कमी हैकृअर्थात् दीर्घकालिक, समझदारीपूर्ण और सुरक्षित वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता अभी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हुई है।

IIM उदयपुर और PRICE की एक स्टडी के अनुसार, लोगों के पास अब वित्तीय सेवाओं की पहुंच तो है, लेकिन वे चक्रवृद्धि ब्याज, महंगाई, जोखिम विविधीकरण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय सिद्धांतों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। वित्तीय संकट की स्थिति में आज भी कई परिवार रिश्तेदारों से उधार लेने, संपत्ति बेचने या महंगे ऋण लेने जैसे अनौपचारिक उपायों पर निर्भर रहते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत से भी कम परिवारों के पास तीन महीने के खर्चों के बराबर आपातकालीन बचत उपलब्ध है। अधिकांश लोग अनावश्यक खर्च से बचकर, बचत को प्राथमिकता तो देते हैं, लेकिन संरचित वित्तीय योजनाकृविशेष रूप से रिटायरमेंट प्लानिंगकृअभी भी कमजोर बनी हुई है। परिवार सामान्यतः दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण की बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और उपभोग जैसी तात्कालिक जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं।

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अध्ययन में यह भी पाया गया कि वित्तीय व्यवहार केवल आय पर निर्भर नहीं करता, बल्कि जागरूकता, शिक्षा और जानकारी तक पहुंच भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। युवा और अधिक शिक्षित लोग वित्तीय योजना और समझ के मामले में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि वित्तीय विविधीकरण की कमी बनी हुई है। अधिकांश परिवार अभी भी बैंक जमा, सोना और रियल एस्टेट जैसे पारंपरिक निवेश साधनों पर ही निर्भर हैं, जबकि इक्विटी और बाजार-आधारित निवेशों में भागीदारी मुख्यतः उच्च आय वर्ग तक सीमित है।

नीति निर्माताओं को केवल वित्तीय पहुंच को मापने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वित्तीय क्षमता निर्माण पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वित्तीय शिक्षा कार्यक्रमों को कम आत्मविश्वास, जटिलता और भरोसे की कमी जैसी व्यवहारिक बाधाओं को भी संबोधित करना होगा।

भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा परिवर्तनकारी रही है, लेकिन अब वास्तविक आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि परिवारों की वित्तीय क्षमता कितनी मजबूत बनती है और वे वित्तीय प्रणाली का आत्मविश्वास के साथ उपयोग करने में कितने सक्षम होते हैं।


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