देश में परीक्षा सुधार पर गठित कार्य बल, जिस का गठन 28 जुलाई को हुआ था, परीक्षाओं के प्रश्न पत्र अवैध तरीके से सार्वजनिक (लीक) होने से रोकने के लिए एक बड़े प्रश्न भंडार से आखिरी समय में प्रश्न पत्र तैयार करने पर विचार कर रहा है। इसके अध्यक्ष नंदन नीलेकणि के अनुसार यह तीन महीने के भीतर अपने सुझाव सौंप सकता है।

नीलेकणि ने ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम, 2026’ में कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) पर्चा लीक ने पारंपरिक प्रश्न पत्रों की जरूरत पर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि इन्हें अवैध तरीके से हासिल करने और बेचने का आर्थिक लालच होता है।

उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि सवाल यह है कि हमें प्रश्न पत्र जैसी चीजों की जरूरत क्यों है ? जैसे ही आपके पास प्रश्न पत्र होता है तो उसे बेचने का आर्थिक लालच पैदा हो जाता है। लिहाजा, इससे बचने का तरीका यह है कि प्रश्नों का एक बहुत बड़ा बैंक हो और केवल आखिरी समय में उस दिन के लिए प्रश्न पत्र तैयार किया जाएं।

उन्होंने कहा कि इससे प्रश्न पत्र हासिल करने और बेचने का आर्थिक लालच खत्म हो जाएगा।

नीलेकणि ने कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक भी परीक्षा के दिन प्रश्न पत्र तैयार तैयार कर सकती है ताकि इन्हें लीक होने से रोका जा सके।

नीलेकणि ने कहा कि परीक्षा सुधार पर गठित यह समिति कंप्यूटर-आधारित परीक्षा के विस्तार पर भी विचार कर रही है जिसके लिए परीक्षा केंद्रों के बड़े तंत्र की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि भारत में अभी लगभग 1,50,000 जगहें हैं जहां उम्मीदवार परीक्षा दे सकते हैं।


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