वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने तकनीक और बिजनेस प्रॉसेस को लेकर उद्योग की चिंताओं के चलते इलेक्ट्रॉनिक वे बिल (ई-वे बिल) में पेश की गई नई सुविधाओं को फिलहाल रोक दिया है। ये बदलाव मूल रूप से 1 अगस्त से लागू होने थे।

ई-वे बिल नियमों में प्रस्तावित बदलावों के तहत व्यवसायों के लिए यह जरूरी कर दिया गया था, कि वे माल पाने वाले अंतिम व्यक्ति का जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर दें। ऐसा तब जरूरी था जब इनवॉइस किसी एक पार्टी के नाम पर बनाया गया हो, लेकिन माल किसी दूसरी पार्टी को या उसी पार्टी की किसी दूसरी जगह पर पहुंचाया जाना हो।

उद्योग समूहों ने बदलावों को लागू करने के लिए और समय मांगा था। उनका तर्क था कि व्यवसायों को अपने ईआरपी सिस्टम में बदलाव करना होगा, ग्राहक डेटाबेस को अपडेट करना होगा और रोलआउट से पहले व्यापक परीक्षण करना होगा। उन्होंने श्बिल-टू/शिप-टूश् के तहत जीएसटीआईएन विवरण एकत्र करने, व्यावसायिक गोपनीयता और प्रस्तावित सत्यापन से उत्पन्न होने वाली अनुपालन चुनौतियों जैसी व्यावहारिक चिंताओं को भी उठाया था।

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जीएसटीएन ने 17 मई की अपनी एडवाइजरी में इन बदलावों का प्रस्ताव किया था, लेकिन अब जीएसटीएन ने 29-07 को जारी एक परामर्श में कहा कि करदाताओं को पिछले परामर्श के आधार पर अपने सिस्टम में कोई बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें इस सिलसिले में आगे की सूचना तक इंतजार करना होगा।

जीएसटीएन ने माल की डिलीवरी के बाद ई-वे बिल को बंद करने की एक स्वैच्छिक सुविधा भी शुरू की है।


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