श्रीधा लेमिनेट के निदेशक रोहित वशिष्ट से लेमिनेट मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में बाजार की अस्थिरता और कच्चे माल की चुनौतियों से उपजी उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर हुई चर्चा का एक आकर्षक और विस्तृत सार दिया गया है:

लेमिनेट उद्योग: संकट, चुनौतियाँ और श्सर्वाइवलश् की रणनीति

वर्तमान में लेमिनेट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र एक अत्यधिक कठिन दौर से गुजर रहा है, जहाँ हर कदम फूंक-फूंक कर रखने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव (जैसे युद्ध और ट्रंप के बयान) के कारण कच्चे माल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।

  1. कच्चे माल का संकट और बढ़ती कीमतें
  • दैनिक उतार-चढ़ाव: कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं हैं; हर दिन नए रेट आ रहे हैं, जिससे लंबी अवधि का सौदा करना जोखिम भरा हो गया है।
  • प्रभावित सामग्रियाँ: लेमिनेट बनाने में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर चीज़ महंगी हो गई है। मुख्य रूप से फिनोल, मेलामाइन, मेथेनॉल (फॉर्मल्डिहाइड हेतु), बीओपीपी फिल्म और पीवीसी दाना के दामों में भारी उछाल आया है।
  • स्थिति यह है कि यदि आज लागत की गणना की जाए, तो कल वह बदल जाती है। इसके कारण कीमतों में तीसरे रिवीजन (Third Revision) की पूरी संभावना है, जो 31 मार्च के बाद आ सकता है। लागत गणना में कठिनाई:
  1. बाजार की प्रतिक्रिया और मांग
  • मिक्स रिस्पॉन्स: बाजार में श्लाइनरश् उत्पादों के बढ़े हुए रेट तो स्वीकार कर लिए गए हैं, लेकिन डेकोरेटिव रेंज (1mm, 0.8mm) में अभी सुस्ती है।

  • वेट एंड वॉच: डिस्ट्रीब्यूटर्स अभी श्देखो और इंतजार करोश् की स्थिति में हैं। मार्च एंडिंग, त्योहारों का सीजन (जैसे रमजान) और कारीगरों की कमी के कारण भी बाजार में फिलहाल ठहराव है।
  1. वित्तीय दबाव (Working Capital Pressure)
  • कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मैन्युफैक्चरर्स पर 30% से 40% अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल का बोझ पड़ा है।
  • यह अतिरिक्त फंड मैन्युफैक्चरर्स को खुद ही मैनेज करना पड़ रहा है, क्योंकि बाजार से तुरंत इतना सहयोग मिलना मुश्किल है।
  1. भविष्य की दोहरी रणनीतिरू प्लान A और प्लान B

संकट से निपटने के लिए उद्योग जगत दो योजनाओं पर काम कर रहा है:

  • शार्ट टर्म-प्लान ए (Plan A): यह वर्तमान स्थिति है जहाँ इस उम्मीद में पूर्ण उत्पादन (Full Production) जारी रखा जा रहा है कि अप्रैल तक सब सामान्य हो जाएगा। इसका उद्देश्य डीलरों को कम से कम 70-80% सर्विस देते रहना है ताकि सिस्टम चलता रहे।
  • लोंग टर्म-प्लान बी (Plan B): यदि संकट जून-जुलाई तक खिंचता है, तो रणनीति बदलनी होगी। इसमें उत्पादन में कटौती की जाएगी, ताकि बाजार में मांग पैदा हो और रेट स्वीकार्य बनें। इसके साथ ही, कंपनी केवल उन चुनिंदा (Selective) पार्टनर्स के साथ काम करेगी, जो लंबे समय तक साथ चल सकें।
  1. संबंधों का श्रिफाइनमेंटश् (Refining Relations)

इस संकट के समय को एक अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। मैन्युफैक्चरर्स अब अपने डीलर नेटवर्क को श्रिफाइनश् कर रहे हैं। रणनीति यह है कि संकट के समय में केवल उन्हीं का साथ दिया जाए जो वफादार और भरोसेमंद हैं, ताकि भविष्य के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय बिजनेस चेन तैयार हो सके।

निष्कर्ष: फिलहाल उद्योग जगत श्वेट एंड वॉचश् की स्थिति में है और उम्मीद कर रहा है कि 2026 एक बेहतर साल साबित होगा। तब तक, स्टेप-बाय-स्टेप चलना ही एकमात्र रास्ता है।


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