Scale of GDP and actual Economic Growth

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हाल में आए आंकडे बता रहे हैं कि भारत की अर्थव्यव्स्था सुधर रही है। लेकिन चिंता की बात यह है कि लंबी अवधि के रूझान देखने पर वृद्धि में तेजी गायब हो जाती है।

इतना निवेश नहीं हो रहा है कि वृद्धि को रफ्तार मिल सके। 2024-2025 में वास्तविक निवेश मात्र 6 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो आर्थिक विस्तार की तुलना में कमतर रहेगा। इसकी तुलना 15 प्रतिशत सालाना वृद्धि वाले 2004 से 2007 के दौर से करें तब जीडीपी का 40 प्रतिशत वास्तविक निवेश हो रहा था, जो अब घटकर केवल 33 प्रतिशत रह गया है।

खुदरा बिक्रि में कमी, ऋण आवंटन में सुस्ती, कंपनियों के कमजोर मुनाफे, सुस्त निर्यात, शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट और मुद्रास्फीति दर जैसे आंकडे भी इसकी तसदीक कर रहे हैं।

कोविड महामारी से पहले अर्थव्यवस्था ठीक नहीं थी और वृद्धि दर घटकर 4 प्रतिशत से कम रह गई थी। असंगठित क्षेत्र की हालत खस्ता हो गई थी। असंगठित क्षे़त्र भी पिछली वृद्धि के दौर में लिए गए जरूरत से ज्यादा कर्ज के बोझ से उबर ही रहा था। कुछ समस्याएं अब भी बनी हुई हैं मगर कुछ खास कारणों से कम दिख रही हैं।

लॉकडाउन के बाद स्थिति सामान्य होने के कारण लोग काम पर लौटने लगे और परिवार पैसा खर्च करने लगे। खुदरा ऋण आसानी से मिलने के कारण खपत भी बढ़ गई। खुदरा ऋण में कुछ समय तक 20 प्रतिशत सालाना वृद्धि हुई। बुनियादी ढ़ाचे पर सरकार का जोर रहा और उस पर खर्च 2021-22 और 2023-24 के दरम्यान औसतन 30 प्रतिशत सालाना बढ़ा। इससे अर्थव्यवस्था को ताकत मिलती गई, जिसने वाहन तथा निर्माण क्षेत्रों को एकदम उछाल दिया। उन तीन साल में निमार्ण क्षेत्र दो अंको में बढ़ा।

कोविड के बाद अर्थव्यवस्था दोबारा खुलने से मिली तेजी खत्म हो गई है, राजकोषीय स्थिति तंग होने और कम रिटर्न मिलता देखकर सरकार ने बुनियादी ढ़ाचे पर खर्च कम कर दिया है।

दूसरे शब्दों में कहें तो कोविड के बाद आई तेजी को समझने में भूल हो गई। तेजी अपवाद थी और इस समय की सुस्ती सामान्य है और 1991 से अभी तक चलती आई 6 प्रतिशत औसत वृद्धि दर के आसपास है।

सवाल है कि लंबे अरसे तक 6 प्रतिशत औसत आर्थिक वृद्धि दर क्या देश की जरूरत पूरी करने के लिए काफी है?

कुल मिलाकर जीडीपी के पैमाने पर दिख रहा अर्थव्यवस्था का आकार और कोविड महामारी के बाद इसकी आर्थिक वृद्धि दर भ्रम में डालती है।

फिलहाल आर्थिक वृद्धि तेज करने के लिए तत्काल एक ठोस योजना की जरूरत है, जो देश की ढ़ाचागत खामियों को दूर कर अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल के लिए मजबूती देगी।


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